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आलोक राज नारायण: असफलताओं के बावजूद आईपीएस बनने की प्रेरणादायक कहानी

आलोक राज नारायण की कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्यों को नहीं छोड़ते। बिहार के नवादा जिले से निकलकर, आलोक ने सीमित संसाधनों में पढ़ाई की और 2021 में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 346वीं रैंक प्राप्त की। उनके पिता ने उनकी पढ़ाई के लिए जमीन तक बेच दी, जिससे आलोक को आर्थिक चिंताओं से मुक्ति मिली। उनकी यात्रा में धैर्य और आत्मविश्वास ने उन्हें सफलता दिलाई। जानें कैसे आलोक ने अपने संघर्षों को पार किया और भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए।
 

आलोक राज नारायण की प्रेरणादायक यात्रा


नवादा: आईपीएस आलोक राज नारायण की सफलता उन सभी के लिए एक प्रेरणा है, जो असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ते। बिहार के नवादा जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर, उन्होंने सीमित संसाधनों में पढ़ाई की। उन्होंने 2015 से संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी शुरू की। पहले छह प्रयासों में असफल रहने के बावजूद, उन्होंने मेहनत जारी रखी। अंततः, 2021 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने 346वीं रैंक प्राप्त की और भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुए। आलोक की कहानी केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है; उन्होंने आर्थिक और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना किया। उनके परिवार ने उनकी पढ़ाई और तैयारी में पूरा सहयोग दिया, यहां तक कि उनके पिता ने उनकी पढ़ाई के लिए जमीन तक बेच दी।


गांव से शुरू हुआ सफर

आलोक राज नारायण बिहार के नवादा जिले के गोरिहारी गांव के निवासी हैं। उनका परिवार साधारण पृष्ठभूमि से है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल में हुई, जहां उन्होंने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की। इसके बाद, उन्होंने रोह हाई स्कूल में शिक्षा प्राप्त की। नौवीं कक्षा में उनका दाखिला जीवन दीप पब्लिक स्कूल में हुआ, जहां से उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पास की। इसके बाद, उन्होंने कोटा से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की और दिल्ली से अभियांत्रिकी की डिग्री हासिल की। तैयारी के दौरान, उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई भी की और इसी विषय को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना।


पिता का त्याग

आलोक की सफलता में उनके परिवार का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनके पिता, नरेश प्रसाद यादव, मध्य विद्यालय नेमदारगंज से सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, बेटे की तैयारी में आर्थिक बाधाएं न आएं, इसके लिए उन्होंने जमीन तक बेच दी। यह जमीन नवादा शहर में मकान बनाने के लिए खरीदी गई थी, लेकिन बेटे की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए परिवार ने इसे बेचने का निर्णय लिया। इस त्याग ने आलोक को आर्थिक चिंताओं से मुक्त रखा।


असफलताओं का सामना

आलोक ने 2015 में संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी शुरू की। पहले छह प्रयास उनके लिए सफल नहीं रहे। लगातार असफलताओं के बावजूद, उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और अपनी कमियों पर काम किया। उनकी यात्रा में धैर्य उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को परीक्षा में छह प्रयास और अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को नौ प्रयास मिलते हैं। आलोक ने शुरुआती असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा।


सातवें प्रयास में मिली सफलता

लगातार प्रयासों के बाद, 2021 की सिविल सेवा परीक्षा में आलोक ने सफलता प्राप्त की। उन्होंने 346वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल की, जो उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी। लगभग 15 वर्षों तक गांव से दूर रहकर मेहनत करने वाले आलोक ने आखिरकार उस मुकाम को हासिल किया, जिसके लिए उन्होंने संघर्ष किया। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि लगातार असफलताओं के बावजूद, तैयारी और आत्मविश्वास बनाए रखना सफलता की कुंजी है।


गृह मंत्रालय में चयन

सिविल सेवा परीक्षा के परिणाम आने से पहले ही आलोक का चयन गृह मंत्रालय के एक पद के लिए हो चुका था। उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थी और 20 जून को उन्हें पद संभालना था। इसी बीच, सिविल सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ और उन्हें 346वीं रैंक मिली। इसके बाद, उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा को चुना। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद, उन्हें उत्तर प्रदेश संवर्ग में नियुक्ति मिली। वर्तमान में, वह उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के शाहाबाद क्षेत्र में अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं।