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हरियाणा में 10वीं और 12वीं की परीक्षा: गणित में सफलता के लिए विशेषज्ञ के सुझाव

हरियाणा में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैं, जिससे छात्रों में तनाव बढ़ रहा है। गणित से संबंधित डर को दूर करने के लिए विशेषज्ञ डॉ. एम.पी. सिंह ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उनका कहना है कि सही तैयारी और नियमित अभ्यास से छात्र न केवल पास हो सकते हैं, बल्कि अच्छे अंक भी प्राप्त कर सकते हैं। जानें कैसे पुराने प्रश्न पत्र हल करने और परीक्षा हॉल में ध्यान रखने योग्य बातों से गणित में आत्मविश्वास बढ़ाया जा सकता है।
 
हरियाणा में 10वीं और 12वीं की परीक्षा: गणित में सफलता के लिए विशेषज्ञ के सुझाव

हरियाणा में बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी



हरियाणा में 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैं। जैसे-जैसे परीक्षा का समय नजदीक आता है, छात्रों और उनके अभिभावकों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। गणित से संबंधित चिंता हमेशा सबसे अधिक होती है। कुछ बच्चे तो 'गणित' शब्द सुनकर ही घबरा जाते हैं। कुछ को सूत्र याद नहीं रहते, तो कुछ प्रश्नों को समझ नहीं पाते। कई बच्चे सोचते हैं कि परीक्षा में किस प्रकार के प्रश्न आएंगे और क्या वे पास हो पाएंगे। यह स्थिति CBSE या हरियाणा बोर्ड के लिए लगभग हर घर में समान है।


सही तैयारी का महत्व

इस समस्या का समाधान करने के लिए, स्थानीय मीडिया ने गणित के विशेषज्ञ डॉ. एम.पी. सिंह से बात की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि गणित से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है; केवल सही तैयारी की जरूरत है। अपने अनुभव के आधार पर, उन्होंने छात्रों के लिए कुछ सुझाव दिए हैं जो न केवल उन्हें पास करने में मदद करेंगे बल्कि अच्छे अंक भी लाने में सहायक होंगे।


डॉ. एम.पी. सिंह का अनुभव

डॉ. एम.पी. सिंह ने 1980 में सरकारी कॉलेज, फरीदाबाद में गणित के व्याख्याता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने लगभग 46 वर्षों तक पढ़ाया है। उनके पास गणित में पीएचडी है और उन्होंने MDA, M.Com, B.Tech, और M.Tech के छात्रों को भी पढ़ाया है। वे कई प्रमुख परीक्षाओं जैसे UPSC और HPSC के लिए छात्रों को प्रशिक्षित कर चुके हैं। उनके 40 से अधिक पुस्तकें बाजार में उपलब्ध हैं, जिनमें कक्षा एक से बारह तक की गणित की किताबें शामिल हैं।


गणित से डरने की आवश्यकता नहीं

डॉ. एम.पी. सिंह का कहना है कि आजकल बच्चे छोटे उम्र से ही गणित से डरने लगते हैं। जैसे ही गणित का नाम लिया जाता है, बच्चे इससे बचने की कोशिश करते हैं। कभी-कभी, अभिभावक भी इस पर ध्यान नहीं देते। पहले के समय में बच्चे बार-बार समस्याओं को हल करते थे और परिवार के सदस्य भी सवाल पूछते थे, जिससे उनके अवधारणाओं की समझ मजबूत होती थी।


अभ्यास की आवश्यकता

बच्चों की आदतें अब बदल गई हैं। वे किताबों में प्रश्नों को देखते हैं और बिना लिखे ही आगे बढ़ जाते हैं। वे पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र भी घर पर हल नहीं करते। डॉ. एम.पी. सिंह का कहना है कि यह सबसे बड़ी गलती है। यदि एक बच्चा पिछले 3 से 5 वर्षों के प्रश्न पत्र हल करता है और स्कूल में शिक्षक के परीक्षण के प्रश्नों का अभ्यास करता है, तो 60-80 प्रतिशत अंक सुनिश्चित हैं। वे विश्वास के साथ कहते हैं कि ऐसे बच्चे कभी असफल नहीं होते।


परीक्षा हॉल में ध्यान रखने योग्य बातें

उन्होंने परीक्षा हॉल में कुछ विशेष बिंदुओं का उल्लेख किया: पहले पूरे पेपर को ध्यान से पढ़ें। पहले आसान प्रश्नों को हल करें। लंबे प्रश्नों को बाद में करें। समय बर्बाद न करें, चारों ओर न देखें, और बार-बार पानी पीने या टॉयलेट जाने से बचें... इससे आपकी एकाग्रता टूट जाती है।


पुराने प्रश्न पत्र हल करें

डॉ. एम.पी. सिंह का कहना है कि गणित में आत्मविश्वास केवल अभ्यास से आता है। यदि एक बच्चा रोजाना अभ्यास करता है, शिक्षक की बात सुनता है, और पुराने प्रश्न पत्र हल करता है, तो वे न केवल पास होंगे बल्कि 90% से अधिक अंक भी ला सकते हैं। गणित से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है; बस मेहनत और समझ के साथ पढ़ाई करें, और सब कुछ आसान हो जाएगा।