सुप्रीम कोर्ट ने NCERT पाठ्यपुस्तक विवाद में विशेषज्ञों पर प्रतिबंध लगाया
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र सरकार और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को निर्देश दिया है कि वे तीन विशेषज्ञों, मिशेल डैनिनो, शिक्षाविद सुपर्णा दिवाकर और कानूनी शोधकर्ता आलोक प्रसन्ना कुमार को स्कूल पाठ्यक्रम तैयार करने या राज्य निकायों में किसी भी पद पर कार्य करने से रोकें। यह निर्णय कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक में विवादास्पद अध्याय से संबंधित है, जिसमें न्यायपालिका पर चर्चा की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह ऐसे मामलों की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन करे, जिसमें एक पूर्व न्यायाधीश, एक शिक्षाविद और एक वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञ शामिल होंगे।
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर चर्चा
यह विवाद एनसीईआरटी की कक्षा 8 की पाठ्यपुस्तक के एक अध्याय से जुड़ा है, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर चर्चा की गई थी, जिसने व्यापक आलोचना को जन्म दिया।
सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सोशल मीडिया पर न्यायपालिका के खिलाफ की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
अदालत का सख्त रुख
उन्होंने कहा कि अदालत न्यायपालिका के बारे में ऑनलाइन अपमानजनक टिप्पणियों को बर्दाश्त नहीं करेगी और न्यायिक संस्थानों की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने केंद्र सरकार को ऐसे बयानों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों और प्लेटफार्मों की पहचान करने का निर्देश दिया ताकि कानूनी कार्रवाई की जा सके। अदालत ने कहा, 'कानून को अपना काम करना चाहिए,' और यह भी कहा कि विदेश में रहने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
अदालत ने न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया और सोशल मीडिया पर की गई अपमानजनक टिप्पणियों को गंभीरता से लेने की बात कही।
NCERT ने मांगी माफी
एनसीईआरटी ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि अध्याय में अनुचित सामग्री 'अनजाने में' शामिल हो गई थी। यह पूरी तरह से अनैच्छिक त्रुटि थी। परिषद ने निदेशक और सदस्यों की ओर से बिना शर्त माफी मांगी और न्यायपालिका को सर्वोच्च सम्मान देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
क्या है पूरा मामला
देश की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। NCERT ने हाल ही में कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब जारी की, जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में जानकारी दी गई। नई किताब में न्यायपालिका को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। भ्रष्टाचार को सबसे गंभीर मुद्दा बताया गया है। यह समस्या आम लोगों के विश्वास को कमजोर करती है, खासकर गरीब और कमजोर वर्ग के लिए न्याय तक पहुंच मुश्किल हो जाती है। किताब में पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई के जुलाई 2025 के बयान का हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और कदाचार से जनता का भरोसा टूटता है। पारदर्शिता और जवाबदेही से ही इसे बहाल किया जा सकता है। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।
