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विश्व हिंदी दिवस: फिजी में हिंदी की यात्रा और वैश्विक महत्व

विश्व हिंदी दिवस हर साल 10 जनवरी को मनाया जाता है, जो हिंदी की वैश्विक उपस्थिति को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। भारत के बाहर, फिजी एकमात्र ऐसा देश है जहां हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है। इस लेख में, हम फिजी में हिंदी की जड़ों, उसकी आधिकारिक मान्यता और हिंदी के महत्व पर चर्चा करेंगे। जानें कैसे हिंदी ने फिजी में अपनी पहचान बनाई और आज यह एक सांस्कृतिक प्रतीक बन चुकी है।
 
विश्व हिंदी दिवस: फिजी में हिंदी की यात्रा और वैश्विक महत्व

विश्व हिंदी दिवस का महत्व


नई दिल्ली: हिंदी, जो भारत और उसके पड़ोसी देशों में व्यापक रूप से बोली जाती है, विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। इसके महत्व को मनाने के लिए, हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। इसके अलावा, भारत में राष्ट्रीय हिंदी दिवस 14 सितंबर को भी मनाया जाता है। इस अवसर पर एक दिलचस्प प्रश्न उठता है: भारत के बाहर वह कौन सा देश है जहां हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है?


फिजी में हिंदी की जड़ें

भारतीय उपमहाद्वीप के बाहर, केवल फिजी ही ऐसा देश है जहां हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिला है। यह दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक खूबसूरत द्वीप राष्ट्र है, जहां हिंदी एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आधार बन चुकी है। फिजी में हिंदी की जड़ें 140 साल पुरानी हैं। ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में, हजारों भारतीय श्रमिकों को गन्ने के बागानों में काम करने के लिए फिजी लाया गया था। ये श्रमिक उत्तरी भारत के विभिन्न क्षेत्रों से आए थे और अपने साथ कई बोलियां जैसे अवधी, भोजपुरी और मगही लेकर आए थे। समय के साथ, इन बोलियों के मिश्रण से फिजी हिंदी का विकास हुआ, जो आज भी प्रचलित है।


फिजी में हिंदी की आधिकारिक मान्यता

1997 में, फिजी ने हिंदी को अपनी तीन राष्ट्रीय भाषाओं में से एक के रूप में आधिकारिक मान्यता दी। इस निर्णय ने इंडो-फिजीयन लोगों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक योगदान को स्वीकार किया। हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह पहचान और सांस्कृतिक निरंतरता का प्रतीक है। फिजी में स्कूल, मीडिया, टेलीविजन कार्यक्रम और रेडियो चैनल नई पीढ़ियों को अपनी भाषाई जड़ों से जोड़ने के लिए हिंदी का उपयोग करते हैं।


फिजी हिंदी और भारतीय हिंदी में अंतर

फिजी हिंदी और भारतीय हिंदी में कई अंतर हैं। फिजी हिंदी की व्याकरण सरल है और इसमें अंग्रेजी और फिजी भाषा के शब्द शामिल हैं। फिर भी, इसमें भारतीय मूल की झलक बरकरार है। भारतीय हिंदी बोलने वाले लोग थोड़ी सी कोशिश से फिजी हिंदी को समझ सकते हैं।


विश्व हिंदी सम्मेलन का महत्व

1975 में, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया, जिसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन का उद्देश्य हिंदी को विश्व स्तर पर मान्यता दिलाना था। विश्व हिंदी दिवस पहली बार 10 जनवरी 2006 को मनाया गया था और तब से यह हर साल मनाया जाता है।


आज हिंदी का महत्व

हिंदी की समृद्ध विरासत और बढ़ती डिजिटल उपस्थिति का जश्न मनाने के लिए विश्वभर में सेमिनार, कार्यशालाएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह एक पहचान और लाखों लोगों के बीच एक साझा भावनात्मक बंधन है। जबकि अंग्रेजी का उपयोग बढ़ रहा है, हिंदी का प्रसार भी जारी है। यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता हिंदी भाषी लोगों को गर्वित करती है।