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राजवीर गुर्जर: दिव्यांगता को मात देकर बने तहसीलदार

राजवीर गुर्जर की कहानी एक प्रेरणा है, जिन्होंने 10 साल की उम्र में एक हादसे में अपने दोनों हाथ खो दिए, लेकिन फिर भी सरकारी अधिकारी बनने का सपना नहीं छोड़ा। उन्होंने अपनी कठिनाइयों को मात देते हुए शिक्षा में उत्कृष्टता हासिल की और राजस्थान प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में सफलता प्राप्त की। जानें कैसे उन्होंने अपने परिवार के समर्थन और मजबूत इरादों से अपने सपनों को साकार किया।
 

राजवीर गुर्जर की प्रेरणादायक कहानी


राजस्थान के दौसा जिले के सालमपुर गांव के निवासी राजवीर गुर्जर ने अपने जीवन में एक कठिनाई का सामना किया, जिसने उनकी दिशा बदल दी। केवल 10 वर्ष की आयु में एक विस्फोट के कारण उन्होंने अपने दोनों हाथ खो दिए। इसके बावजूद, उन्होंने शिक्षा और सरकारी अधिकारी बनने का सपना नहीं छोड़ा।


हादसे का कारण

राजवीर ने बताया कि बचपन में उन्हें सड़क पर एक वस्तु मिली, जो उन्हें खिलौने जैसी लगी। जब उन्होंने उसे घर लाकर खेलने की कोशिश की, तो वह वस्तु फट गई, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।


दिव्यांगता को ताकत में बदला

इस हादसे के बाद, राजवीर ने पढ़ाई जारी रखने की चुनौती का सामना किया। उन्होंने अपने दोनों अग्रबाहुओं के बीच पेन पकड़कर लिखना सीखा और इसी तरह से अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई पूरी की।


राजवीर का मानना है कि किसी भी शारीरिक दिव्यांगता को अपने मनोबल पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उनके अनुसार, मजबूत इरादे से कोई भी व्यक्ति कठिनाइयों को पार कर सकता है।


अधिकारी बनने का सपना

राजवीर का हमेशा से अधिकारी बनने का सपना था। उन्होंने अधिकारियों को देखकर खुद को भी उसी भूमिका में देखने की इच्छा रखी। हालांकि, उनकी शारीरिक स्थिति के कारण राजस्थान पुलिस सेवा उनके लिए संभव नहीं थी, लेकिन उन्होंने सार्वजनिक सेवा में जाने की इच्छा नहीं छोड़ी।


शिक्षा में उपलब्धियां

राजवीर ने हिंदी और राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री प्राप्त की। शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) की परीक्षा की तैयारी शुरू की। उनके लिए यह परीक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने सपने को पूरा करने का रास्ता थी।


पहली कोशिश में असफलता

RAS 2024 की परीक्षा में उन्हें पहली बार सफलता नहीं मिली। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दोबारा प्रयास करने का निर्णय लिया। उन्होंने स्व-अध्ययन के माध्यम से अपनी तैयारी जारी रखी और दूसरे प्रयास में परीक्षा पास कर ली।


दूसरी कोशिश में सफलता

दूसरे प्रयास में, राजवीर ने RAS परीक्षा में सफलता प्राप्त की और दिव्यांग श्रेणी में चौथी रैंक हासिल की। इसके बाद, राजस्थान लोक सेवा आयोग ने उन्हें राज्य प्रशासन में तहसीलदार के पद पर नियुक्त किया।


परिवार का समर्थन

राजवीर के पिता विक्रम सिंह पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल हैं, और उनकी मां गृहिणी हैं। राजवीर के अनुसार, पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान उनका परिवार हमेशा उनके साथ खड़ा रहा।


दूसरों की मदद करने की इच्छा

राजवीर, जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं, ने अपने आसपास के लोगों की कठिनाइयों को देखा है। अब अधिकारी बनने के बाद, वह ईमानदारी से काम करना चाहते हैं, विशेष रूप से दिव्यांग और मेहनती बच्चों की मदद करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।


कठिनाइयों से लड़ने की प्रेरणा

राजवीर गुर्जर की कहानी केवल RAS परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है। 10 साल की उम्र में दोनों हाथ खोने के बाद, उन्होंने लिखने का नया तरीका सीखा और पढ़ाई जारी रखी। पहली परीक्षा में असफल होने के बाद भी उन्होंने प्रयास जारी रखा और अंततः राजस्थान प्रशासन में तहसीलदार के पद तक पहुंचे।