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भारतीय महिला ने साझा किया विदेश के कार्य संस्कृति का अनुभव

एक भारतीय महिला ने विदेश के कार्य संस्कृति पर अपने अनुभव साझा किए हैं, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैसे विदेश में काम के बाद कॉल्स का दबाव नहीं होता और कर्मचारी अपनी व्यक्तिगत जिंदगी का आनंद ले सकते हैं। उनके विचारों ने कई लोगों को प्रभावित किया है और इस पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। जानें उनके अनुभव और कार्य-जीवन संतुलन के महत्व के बारे में।
 
भारतीय महिला ने साझा किया विदेश के कार्य संस्कृति का अनुभव

भारतीय महिला का विदेश कार्य संस्कृति पर अनुभव


नई दिल्ली: कार्य-जीवन संतुलन के मुद्दे पर भारत और अन्य देशों की तुलना अक्सर की जाती है। हाल ही में एक भारतीय महिला का वीडियो इस विषय पर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।


वीडियो में एक व्यक्ति ने जब उनसे विदेश के कार्य संस्कृति के बारे में पूछा, तो महिला ने अपने अनुभव साझा किए। उनकी बातें सुनकर कई लोग उनसे जुड़ते नजर आए।


काम के बाद कॉल्स का नहीं होता दबाव

महिला ने बताया कि भारत में उनके कई मित्र देर रात तक ऑफिस से जुड़े कॉल्स लेते हैं। काम खत्म होने के बाद भी फोन और संदेश आते रहते हैं। इसके विपरीत, विदेश में ऑफिस का समय खत्म होते ही काम भी वहीं रुक जाता है। कर्मचारियों से यह अपेक्षा नहीं की जाती कि वे अपने व्यक्तिगत समय में भी काम से जुड़े रहें।


लैपटॉप बंद करने की पूरी आजादी

महिला के अनुसार, वह बिना किसी डर या दबाव के अपना लैपटॉप बंद कर सकती हैं। ऑफिस के बाद न तो ईमेल चेक करने की आवश्यकता होती है और न ही किसी संदेश का जवाब देने की मजबूरी। यह आदत उन्हें मानसिक शांति देती है और व्यक्तिगत जीवन को खुलकर जीने का अवसर प्रदान करती है।


वर्क और पर्सनल लाइफ में साफ फर्क

विदेशी कार्य संस्कृति में काम और व्यक्तिगत जीवन के बीच एक स्पष्ट सीमा होती है। महिला ने बताया कि वहां कर्मचारियों के आराम और व्यक्तिगत समय का सम्मान किया जाता है। यही कारण है कि लोग परिवार, दोस्तों और खुद के लिए समय निकाल पाते हैं।


कर्मचारियों की सेहत को मिलती है प्राथमिकता

महिला का मानना है कि जब कर्मचारियों को मानसिक शांति मिलती है, तो वे काम के दौरान अधिक ध्यान केंद्रित रहते हैं। यही सोच वहां की कंपनियों को अलग बनाती है और लंबे समय तक बेहतर परिणाम देती है।


सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया

इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई उपयोगकर्ताओं ने विदेश के कार्य संस्कृति की प्रशंसा की, जबकि कुछ ने कहा कि भारत में भी धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है। अधिकांश लोगों ने कार्य-जीवन संतुलन को आवश्यक बताया।