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भारत सरकार की नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना: विदेश में पढ़ाई का सुनहरा अवसर

भारत सरकार ने नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना की शुरुआत की है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को विदेश में मास्टर या पीएचडी की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस योजना के तहत 125 छात्रों को हर साल लाभ मिलता है। आवेदन प्रक्रिया सरल और डिजिटल है, जिसमें आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करना होता है। जानें इस योजना के लाभ और आवेदन की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से।
 
भारत सरकार की नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना: विदेश में पढ़ाई का सुनहरा अवसर

विदेश में उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप


भारत में कई छात्र विदेश जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखते हैं, लेकिन वित्तीय बाधाओं के कारण यह संभव नहीं हो पाता। इस समस्या का समाधान करने के लिए, भारत सरकार ने नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना की शुरुआत की है।


यह योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा संचालित है, जो आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के छात्रों को विदेश में मास्टर या पीएचडी की पढ़ाई के लिए पूरी वित्तीय सहायता प्रदान करती है। हर वर्ष इस स्कॉलरशिप का लाभ 125 छात्रों को मिलता है.


स्कॉलरशिप के लिए आवेदन की प्रक्रिया

नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप का उद्देश्य उन प्रतिभाशाली छात्रों को विदेशी शिक्षा का अवसर प्रदान करना है, जो अनुसूचित जातियों, विमुक्त/घुमंतू/अर्ध-घुमंतू जनजातियों, भूमिहीन कृषि श्रमिकों और पारंपरिक कारीगर परिवारों से आते हैं।


आवेदन के लिए कुछ आवश्यक शर्तें हैं, जैसे कि उम्मीदवार को योग्य परीक्षा में कम से कम 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने चाहिए। इसके अलावा, आवेदन की अधिकतम आयु 35 वर्ष होनी चाहिए और परिवार की कुल वार्षिक आय 8 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। छात्र को किसी मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालय में प्रवेश प्राप्त होना चाहिए। इस योजना में हर वर्ष 30 प्रतिशत सीटें महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होती हैं।


स्कॉलरशिप के लाभ

इस योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया सरल और डिजिटल है। इच्छुक छात्र आधिकारिक वेबसाइट nosmsje.gov.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। वहां लॉगिन आईडी बनाकर व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी भरनी होती है, साथ ही आवश्यक दस्तावेज जैसे जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और प्रवेश प्रमाण पत्र अपलोड करने होते हैं।


चयन प्रक्रिया साल में दो बार होती है, पहला चरण फरवरी-मार्च में और दूसरा चरण सितंबर-अक्टूबर में। उच्च रैंक वाली विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने वाले छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है। इस योजना के तहत छात्रों को पूरी ट्यूशन फीस, रहने और खाने का मासिक भत्ता, अकादमिक जरूरतों के लिए ग्रांट, वीजा फीस, मेडिकल बीमा और भारत से विदेश और वापसी का हवाई टिकट भी प्रदान किया जाता है।