भारत के पहले आईपीएस अधिकारी: सी.वी. नरसिम्हन की प्रेरणादायक कहानी
भारतीय पुलिस सेवा की स्थापना
1948 में स्वतंत्रता के बाद भारत में पुलिस व्यवस्था को नया आकार देने के लिए भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की स्थापना की गई। इस सेवा के पहले बैच के सबसे वरिष्ठ सदस्य और देश के पहले आईपीएस अधिकारी माने जाने वाले चक्रवर्ती विजयराघव नरसिम्हन (सी.वी. नरसिम्हन) ने स्वतंत्र भारत की पुलिस सेवा की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सी.वी. नरसिम्हन की पहली तनख्वाह
आज के समय में आईपीएस अधिकारियों की सैलरी लाखों में होती है, लेकिन सी.वी. नरसिम्हन की प्रारंभिक तनख्वाह केवल 400 रुपये प्रति माह थी। उस समय यह राशि सम्मानजनक मानी जाती थी। उनका जन्म 21 मई 1915 को मद्रास में हुआ, और वे बचपन से ही मेधावी छात्र रहे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा तिरुचिरापल्ली के सेंट जोसेफ कॉलेज में हुई।
विदेश में शिक्षा प्राप्त करना
इसके बाद, उन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और फिर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। उस समय विदेश जाकर पढ़ाई करना बहुत कम लोगों के लिए संभव था। उनकी विदेशी शिक्षा ने उनके दृष्टिकोण को विस्तारित किया और उन्हें नई सोच दी। 1948 में जब स्वतंत्र भारत में पहली बार आईपीएस भर्ती परीक्षा आयोजित की गई, तो नरसिम्हन ने इसे सफलतापूर्वक पास किया।
पुलिस सेवा में योगदान
नरसिम्हन ने आईपीएस को चुना, जबकि उनके पास आईएएस जैसी अन्य सेवाओं का विकल्प भी था। उनका मानना था कि पुलिस सेवा में रहकर वे समाज के लिए अधिक योगदान कर सकते हैं। प्रारंभ में, उन्हें असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस के पद पर नियुक्त किया गया। उनकी पहली सैलरी 400 रुपये थी, जो उस समय की महंगाई और जिम्मेदारियों के अनुसार ठीक मानी जाती थी।
उन्होंने अपनी सेवा को केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का माध्यम माना। तमिलनाडु पुलिस में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए, वे अंततः डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) के पद तक पहुंचे। इसके अलावा, उन्होंने सीबीआई के निदेशक के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। 1974 में, वे गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनने वाले पहले आईपीएस अधिकारी बने, जो पहले केवल आईएएस अधिकारियों के लिए आरक्षित था।
सम्मान और उपलब्धियां
उनकी ईमानदारी, मेहनत और समर्पण के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले। 1962 में उन्हें पुलिस मेडल, 1971 में राष्ट्रपति पुलिस पदक और 2001 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, उन्होंने महाभारत का अंग्रेजी में अनुवाद भी किया, जो उनकी साहित्यिक रुचि को दर्शाता है। सी.वी. नरसिम्हन का निधन 2 नवंबर 2003 को 88 वर्ष की आयु में चेन्नई में हुआ।
