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गाजियाबाद में नाबालिग लड़कियों की आत्महत्या: ऑनलाइन गेम का खतरनाक प्रभाव

गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या ने समाज में हड़कंप मचा दिया है। यह घटना ऑनलाइन गेम के खतरनाक प्रभाव को उजागर करती है। महिला आयोग की अध्यक्ष ने इस मामले पर चिंता जताते हुए स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे बच्चों को ऑनलाइन कक्षाएं या होमवर्क न दें। जानें इस घटना के पीछे की कहानी और इसके समाज पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में।
 
गाजियाबाद में नाबालिग लड़कियों की आत्महत्या: ऑनलाइन गेम का खतरनाक प्रभाव

उत्तर प्रदेश में एक दुखद घटना


उत्तर प्रदेश: गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है। यह घटना मोबाइल और ऑनलाइन गेम के बच्चों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव को उजागर करती है। इस दुखद मामले के बाद, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने ऑनलाइन कक्षाओं को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि स्कूलों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे बच्चों को ऑनलाइन कक्षाएं या होमवर्क न दें।


गाजियाबाद में हुई आत्महत्या

गाजियाबाद की भारत सिटी सोसायटी में बुधवार रात तीन नाबालिग बहनों ने एक ऊंची इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली। रात करीब 2:30 बजे, जब पूरा क्षेत्र सो रहा था, अचानक तेज आवाज ने सन्नाटे को चीखों में बदल दिया। मृतक लड़कियों के पिता चेतन कुमार ने इस घटना के लिए एक ऑनलाइन कोरियन टास्क आधारित गेम को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि उनकी बेटियां काफी समय से इस गेम को खेल रही थीं, और गेम का अंतिम टास्क बेहद खतरनाक था, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।


गेम की लीडर कौन थी?

पुलिस जांच में यह पता चला है कि 14 वर्षीय प्राची इस गेम की लीडर थी। वह अपनी बहनों को गेम के टास्क समझाती थी और सभी बहनें हर काम एक साथ करती थीं, जैसे खाना, सोना, स्कूल जाना और गेम खेलना। यही कारण है कि उन्होंने यह खतरनाक कदम भी एक साथ उठाया।


समाज के लिए एक चेतावनी

महिला आयोग की अध्यक्ष ने आगरा जिला जेल का दौरा किया और महिला कैदियों से मुलाकात की। मीडिया से बातचीत में उन्होंने गाजियाबाद की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आत्महत्या समाज के लिए एक चेतावनी है। यह घटना बच्चों पर डिजिटल दबाव और ऑनलाइन सामग्री के गहरे प्रभाव को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि बच्चों के हाथों में मोबाइल फोन उनकी मानसिक सेहत के लिए खतरा बन रहे हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


डिजिटल लत और मानसिक तनाव

बबीता चौहान ने कहा कि COVID-19 महामारी के बाद से कई स्कूलों ने मोबाइल फोन के जरिए होमवर्क भेजना शुरू कर दिया है, जिससे बच्चे स्क्रीन पर अधिक निर्भर हो गए हैं। यह डिजिटल लत अक्सर मानसिक तनाव और अवसाद का कारण बन सकती है।


क्लासरूम में पढ़ाई का महत्व

उन्होंने कहा कि महिला आयोग अब स्कूलों को मोबाइल फोन के जरिए होमवर्क देने से रोकने के लिए कदम उठाएगा। आयोग संबंधित स्कूलों को पत्र भेजेगा ताकि वे मोबाइल फोन के बजाय सुरक्षित और वैकल्पिक तरीके अपनाने के लिए प्रेरित हों। महामारी के दौरान ऑनलाइन कक्षाएं आवश्यक थीं, लेकिन अब बच्चों को क्लासरूम में किताबों से पढ़ाया जाना चाहिए।


माता-पिता से अपील

महिला आयोग की अध्यक्ष ने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और उनसे नियमित रूप से बात करें। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और मानसिक विकास स्कूलों और माता-पिता की साझा जिम्मेदारी है। गाजियाबाद की घटना से सबक लेकर ठोस कदम उठाने का समय आ गया है।