एक युवक की प्रेरणादायक यात्रा: इंजीनियरिंग छोड़कर लेंसकार्ट में सीनियर टेक पद तक पहुंचा
सफलता की कहानी
आज के दौर में जब अच्छी नौकरी पाना युवाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, कुछ प्रेरणादायक कहानियां यह दर्शाती हैं कि सफलता केवल डिग्री पर निर्भर नहीं करती। एक 33 वर्षीय युवक की कहानी इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर सीखने की चाह और कठिनाइयों का सामना करने का साहस किसी की किस्मत बदल सकता है। यह युवक इंजीनियरिंग कॉलेज छोड़ने के बाद भी हार नहीं माना और आज लेंसकार्ट में सीनियर टेक के पद पर कार्यरत है।
शिक्षा का सफर
दिल्ली के एक प्रतिष्ठित स्कूल से शिक्षा प्राप्त करने वाले इस युवक का शैक्षणिक सफर अपेक्षाकृत आसान नहीं रहा। इंजीनियरिंग की पढ़ाई को बीच में छोड़ने के बाद, उन्होंने डिस्टेंस मोड से बीबीए की डिग्री हासिल की। प्रारंभिक दिनों में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हुए, उन्होंने कॉल सेंटर और इवेंट मैनेजमेंट जैसे छोटे-मोटे कामों से अपने करियर की शुरुआत की।
एंकरिंग से आत्मविश्वास में वृद्धि
स्वभाव से शांत और कम बोलने वाले इस युवक ने शादियों और पार्टियों में एंकरिंग का कार्य किया। शुरुआत में उनकी मासिक आय 5,000 से 20,000 रुपये के बीच थी, लेकिन इस अनुभव ने उनके अंदर का डर समाप्त किया और सार्वजनिक बोलने का आत्मविश्वास विकसित किया।
सेल्स सेक्टर में नई सीख
2018 से 2021 के बीच, उन्होंने सेल्स इंडस्ट्री में काम किया, जहां उनकी मासिक आय 20,000 से 32,000 रुपये के बीच रही। इस दौरान उन्होंने ग्राहकों की आवश्यकताओं को समझना, बिजनेस की बारीकियों को सीखना और अपनी संचार कौशल को बेहतर बनाना सीखा।
कोडिंग सीखी, जीवन बदला
2022 उनके करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। सेल्स जॉब के साथ-साथ, उन्होंने रातों को जागकर प्रोग्रामिंग सीखी। अपनी सॉफ्टवेयर इंजीनियर बहन के मार्गदर्शन में, उन्होंने फुल-स्टैक डेवलपमेंट में महारत हासिल की और आईटी क्षेत्र में 45,000 रुपये की मासिक सैलरी के साथ पहली नौकरी पाई।
छंटनी के बाद भी प्रयास जारी
2023 में, उन्हें एक स्टार्टअप में सीनियर इंजीनियर की भूमिका मिली, जहां उनकी सैलरी 71,000 रुपये तक पहुंच गई। हालांकि, जनवरी 2024 में आर्थिक मंदी के कारण उन्हें नौकरी गंवानी पड़ी। इसके बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और नई नौकरियों के लिए प्रयास जारी रखा।
लेंसकार्ट में सफलता
मई 2024 में, उन्हें एक प्रतिष्ठित संस्थान में नौकरी मिली, जहां उनका वेतन 1.15 लाख रुपये प्रति माह हो गया। इसके बाद, उन्होंने खुद को और बेहतर बनाने की चुनौती स्वीकार की और अंततः लेंसकार्ट का इंटरव्यू सफलतापूर्वक पास कर लिया।
आज वह 1.65 लाख रुपये मासिक वेतन पर कार्यरत हैं और साथ ही डिस्टेंस मोड से एमसीए की पढ़ाई भी कर रहे हैं। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि मेहनत और सीखने की लगन से किसी भी असफलता को सफलता में बदला जा सकता है।
