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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और शिक्षा: डिग्री की भूमिका में बदलाव

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव से शिक्षा में डिग्री की प्रासंगिकता में बदलाव आ रहा है। पूर्व यूजीसी चेयरमैन एम. जगदीश कुमार ने बताया कि भविष्य में केवल डिग्री पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। छात्रों को व्यावहारिक कौशल और नई तकनीकों की समझ विकसित करनी होगी। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है और छात्रों के लिए नई सुविधाओं के बारे में।
 
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और शिक्षा: डिग्री की भूमिका में बदलाव

नई दिल्ली में शिक्षा पर बहस


नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव ने शिक्षा और करियर के संदर्भ में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। पूर्व यूजीसी चेयरमैन एम. जगदीश कुमार का मानना है कि भविष्य में पारंपरिक डिग्री की प्रासंगिकता में कमी आ सकती है, और केवल डिग्री पर निर्भर रहना अब पर्याप्त नहीं होगा।


तकनीकी बदलाव की आवश्यकता

उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया कि तकनीक के तेजी से बदलते माहौल में सीखने के तरीकों में भी बदलाव लाना आवश्यक हो गया है। पहले जहां बदलाव में वर्षों लगते थे, अब वही परिवर्तन बहुत कम समय में हो जाते हैं। ऐसे में जो ज्ञान आज दिया जा रहा है, वह अगले साल तक पुराना हो सकता है।


छात्रों की चिंताएं

एम. जगदीश कुमार की राय


एम. जगदीश कुमार के अनुसार, छात्रों में यह चिंता बढ़ रही है कि उनकी डिग्री भविष्य में अप्रासंगिक न हो जाए। विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि अब नौकरी पाने के लिए केवल डिग्री नहीं, बल्कि व्यावहारिक कौशल और नई तकनीकों की समझ भी आवश्यक हो गई है।


भविष्य की दिशा

आने वाले समय में क्या होगा?


उन्होंने स्पष्ट किया कि डिग्री पूरी तरह समाप्त नहीं होगी, लेकिन इसकी महत्वता कम हो सकती है। वर्तमान में कंपनियां उन लोगों को प्राथमिकता देती हैं जिनके पास नई स्किल्स हैं और जो लगातार अपने ज्ञान को अपडेट करते रहते हैं।


नई सुविधाएं छात्रों के लिए

छात्रों के लिए नई सुविधाएं


यूजीसी ने छात्रों के लिए कई नई सुविधाएं शुरू की हैं। स्वयं और स्वयं प्लस जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से छात्र विभिन्न विषयों में नए कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा, कई विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन डिग्री प्रदान करने की अनुमति दी गई है, जिससे पढ़ाई और अधिक लचीली हो गई है।


एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट जैसे सिस्टम से छात्र विभिन्न कोर्स करके क्रेडिट जमा कर सकते हैं और आवश्यकता अनुसार अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ा सकते हैं। यह व्यवस्था छात्रों को लगातार सीखते रहने और नई स्किल्स जोड़ने में मदद करती है।


विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में वही लोग सफल होंगे जो निरंतर सीखते रहेंगे और नई तकनीकों को अपनाएंगे। इसलिए छात्रों के लिए यह आवश्यक है कि वे केवल डिग्री तक सीमित न रहें, बल्कि समय-समय पर अपनी स्किल्स को अपडेट करते रहें।