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UPESSC परीक्षा रद्द: सफल उम्मीदवारों की मांगें

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) द्वारा सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। सफल उम्मीदवारों ने आयोग से मांग की है कि केवल दोषियों को दंडित किया जाए और ईमानदारी से पास हुए उम्मीदवारों को साक्षात्कार के माध्यम से नौकरी दी जाए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया, जिसके पीछे परीक्षा में गंभीर अनियमितताओं का पता लगाना था। अब आयोग नई परीक्षा की तैयारी कर रहा है, लेकिन उम्मीदवारों की मांग है कि उनके साक्षात्कार भी कराए जाएं।
 
UPESSC परीक्षा रद्द: सफल उम्मीदवारों की मांगें

UPESSC परीक्षा रद्द


UPESSC परीक्षा रद्द: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) के सहायक प्रोफेसर भर्ती का मामला फिर से चर्चा में है। विज्ञापन संख्या 51 के तहत आयोजित परीक्षा को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है। सफल उम्मीदवार इस निर्णय से बेहद निराश हैं। उन्होंने आयोग कार्यालय जाकर एक ज्ञापन प्रस्तुत किया और मांग की कि केवल उन लोगों को दंडित किया जाए जिन्होंने अनियमितताएँ कीं, जबकि बाकी सफल उम्मीदवारों को साक्षात्कार के बाद नौकरी दी जाए।


सफल उम्मीदवारों की मांगें

सफल उम्मीदवारों की मांगें:
उम्मीदवारों का कहना है कि परीक्षा में शामिल होने वाले विघटनकारी तत्वों को अयोग्य ठहराया जाए और दंडित किया जाए, लेकिन जो लोग ईमानदारी से पास हुए हैं, उन्हें साक्षात्कार के बाद नियुक्तियाँ दी जाएं। वे नहीं चाहते कि पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द हो और सभी को फिर से परीक्षा देनी पड़े। उन्होंने आयोग के अध्यक्ष को संबोधित ज्ञापन प्रस्तुत किया। यह ज्ञापन सीधे आयोग कार्यालय में दिया गया।


भर्ती रद्द होने का कारण

भर्ती रद्द होने का कारण:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश पर, आयोग ने इस भर्ती परीक्षा को पूरी तरह से रद्द कर दिया। इसका कारण परीक्षा में बड़ी अनियमितताओं का पता लगाना था। योगी सरकार ने कहा कि परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ फिर से आयोजित किया जाना चाहिए। पुरानी परीक्षा 16 और 17 अप्रैल 2025 को आयोजित की गई थी। इसके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे कि तब के आयोग के अध्यक्ष को भी इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।


अनियमितता का मामला और गिरफ्तारी

अनियमितता का मामला और गिरफ्तारी:
परीक्षा में अनियमितता के मामले में, तब के आयोग के अध्यक्ष के निजी सहायक मेहबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार किया। उन पर पेपर लीक करने और उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप था। इसी कारण पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठे और अंततः इसे रद्द कर दिया गया। अब सफल उम्मीदवार मांग कर रहे हैं कि केवल दोषियों को दंडित किया जाए, और निर्दोषों के करियर को बर्बाद न किया जाए। आयोग अब नई परीक्षा की तैयारी कर रहा है, लेकिन उम्मीदवार चाहते हैं कि उनके साक्षात्कार कराए जाएं। यह देखना बाकी है कि आयोग और सरकार इस ज्ञापन पर क्या निर्णय लेते हैं।