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NEET परीक्षा में तकनीकी बदलाव की मांग, ऑनलाइन मोड पर जोर

NEET परीक्षा को लेकर हाल ही में विवाद उठ खड़ा हुआ है, जिसमें परीक्षा रद्द होने और पेपर लीक के आरोप शामिल हैं। छात्रों और विशेषज्ञों ने अब NEET को ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में आयोजित करने की मांग की है। विशेषज्ञ समिति ने सुझाव दिया है कि तकनीकी सुधारों के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ाया जा सकता है। इस लेख में जानें कि कैसे ये बदलाव परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित और सुविधाजनक बना सकते हैं।
 
NEET परीक्षा में तकनीकी बदलाव की मांग, ऑनलाइन मोड पर जोर

NEET परीक्षा में विवाद और तकनीकी सुधार की आवश्यकता



देश की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET के संबंध में एक बार फिर से विवाद उत्पन्न हुआ है। परीक्षा के रद्द होने और पेपर लीक के आरोपों के चलते अब NEET को ऑनलाइन या हाइब्रिड मोड में आयोजित करने की मांग जोर पकड़ रही है। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक ऑफलाइन परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही गड़बड़ियों को रोकने के लिए तकनीकी बदलाव आवश्यक हो गए हैं।


पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के कई मामले सामने आए हैं। NEET परीक्षा को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए, जिससे परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे। इस बीच, केंद्र सरकार और शिक्षा विभाग द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने परीक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलावों की सिफारिश की है।


विशेषज्ञ समिति का मानना है कि NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा को पूरी तरह डिजिटल या हाइब्रिड मोड में आयोजित करने से पेपर लीक की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। समिति ने सुझाव दिया है कि परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षित कंप्यूटर आधारित परीक्षण प्रणाली लागू की जाए, जिससे प्रश्नपत्रों की गोपनीयता बनी रहे और मानव हस्तक्षेप कम हो।


रिपोर्टों के अनुसार, विशेषज्ञ पैनल ने परीक्षा प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत निगरानी तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया है। इसमें फेस रिकग्निशन, लाइव मॉनिटरिंग, बायोमेट्रिक सत्यापन और एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र वितरण जैसी तकनीकों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इससे फर्जी उम्मीदवारों और संगठित नकल गिरोहों पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।


कमेटी ने यह भी कहा है कि हाइब्रिड मॉडल अपनाने से छात्रों को सुविधा मिल सकती है। इस मॉडल में कुछ हिस्से ऑनलाइन और कुछ ऑफलाइन आयोजित किए जा सकते हैं। इससे परीक्षा केंद्रों पर भीड़ कम होगी और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।