NEET PG 2025 में कट-ऑफ में कमी: क्या यह चिकित्सा शिक्षा में फैकल्टी संकट का समाधान है?
NEET PG 2025 के लिए कट-ऑफ में बदलाव
NEET: राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड ने हाल ही में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) PG 2025 के लिए योग्य कट-ऑफ में संशोधन किया है। इस बदलाव के तहत, SC, ST और OBC उम्मीदवारों के लिए नया कट-ऑफ शून्य (0) कर दिया गया है, जबकि सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए यह 7वें पर्सेंटाइल पर है। इस परिवर्तन के बाद, NEET PG 2025 में यदि कोई उम्मीदवार -40 अंक भी प्राप्त करता है, तो वह स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों के लिए पात्र होगा। हालांकि, इस निर्णय के खिलाफ देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
फैकल्टी की कमी का मुद्दा
यह माना जा रहा है कि यह निर्णय MD-MS जैसे स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में खाली सीटों को भरने के लिए लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि MBBS छात्रों के शैक्षणिक मानकों में गिरावट का कारण फैकल्टी की कमी है, जिसके चलते अधिकांश छात्र NEET PG में सफल नहीं हो पा रहे हैं। यह कदम चिकित्सा कॉलेजों में भविष्य में फैकल्टी की कमी को भी दूर करने के लिए उठाया गया है।
चिकित्सा कॉलेजों के लिए फैकल्टी के नियम
चिकित्सा कॉलेज को मान्यता प्राप्त करने के लिए आवश्यकताएँ:
1. कॉलेज में 20 से अधिक विभागों में विशेषज्ञ फैकल्टी होनी चाहिए।
2. एक प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर और तीन से अधिक सहायक प्रोफेसर होने चाहिए।
3. MBBS के बाद MS-MD, DNB करने वाले डॉक्टर कुछ वर्षों के अनुभव के बाद चिकित्सा फैकल्टी के रूप में भर्ती हो सकते हैं।
चिकित्सा शिक्षा का विस्तार
पिछले दशक में चिकित्सा कॉलेजों की संख्या में वृद्धि:
देश में चिकित्सा शिक्षा का ढांचा तेजी से बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, पिछले दशक में चिकित्सा कॉलेजों की संख्या दोगुनी हो गई है। 2013 में 387 चिकित्सा कॉलेज थे, जबकि 2025 में 731 कॉलेज कार्यरत हैं।
फैकल्टी संकट का विश्लेषण
फैकल्टी की स्थिति:
1. सफदरजंग मेडिकल कॉलेज में 398 स्वीकृत फैकल्टी पद हैं, जिनमें से 70 पद 2025 में खाली हैं।
2. AIIMS में 2025 में 2500 से अधिक फैकल्टी की रिक्तियाँ हैं।
3. दिल्ली के भीमराव अंबेडकर मेडिकल कॉलेज में 2025 में 50 प्रतिशत से अधिक फैकल्टी पद खाली हैं।
क्या कट-ऑफ में कमी फैकल्टी संकट का समाधान है?
डॉ. रोहन कृष्णन का दृष्टिकोण:
फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशंस के मुख्य संरक्षक डॉ. रोहन कृष्णन का कहना है कि इस निर्णय को फिलहाल NEET PG सीटों को भरने के उपाय के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि फैकल्टी की कमी है और MBBS छात्रों को सही तरीके से पढ़ाया नहीं जा रहा है। हालांकि, NEET UG कट-ऑफ में कमी से भविष्य में फैकल्टी बनने वाले छात्रों को 10 वर्षों का अनुभव भी आवश्यक होगा।
