NEET पेपर लीक मामले में CBI की जांच: 5 लाख से 50 लाख तक की कीमत पर बेचे गए प्रश्न पत्र
NEET पेपर लीक की जांच में चौंकाने वाले खुलासे
CBI की जांच में यह सामने आया है कि NEET परीक्षा के प्रश्न पत्रों को एक सिंडिकेट ने छात्रों के परिवारों की आर्थिक स्थिति के अनुसार ₹5 लाख से ₹50 लाख तक की कीमतों में बेचा। छात्रों से लिए गए खाली चेक और मूल दस्तावेज़ को गारंटी के रूप में रखा गया। इसके अलावा, एक आरोपी, जो महाराष्ट्र में एक कोचिंग संस्थान का निदेशक है, 8 एकड़ ज़मीन पर एक स्कूल और कॉलेज बनाने की योजना बना रहा था।
परीक्षा के पेपरों की कीमत और भुगतान की प्रक्रिया
CBI की रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा के प्रश्न पत्रों की कोई निश्चित कीमत नहीं थी; यह हर परिवार की आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता था। प्रारंभ में केवल एक टोकन राशि ली जाती थी, और शेष राशि का भुगतान तब किया जाता था जब 'आंसर की' जारी होती और यह पुष्टि होती कि 'क्वेश्चन बैंक' असली परीक्षा के पेपर से मेल खाता है। हालांकि, परीक्षा के बाद कई माता-पिता ने भुगतान करने से मना कर दिया, यह कहते हुए कि भौतिकी के कुछ प्रश्न असली पेपर से मेल नहीं खाते थे।
सिंडिकेट की गतिविधियाँ जारी
घोटाले के उजागर होने के बावजूद, सिंडिकेट पैसे वसूलने में सक्रिय था। राजस्थान के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने 8 मई को एक अभियान चलाया, जिसमें एक छात्र से पूछताछ के दौरान एक दलाल ने छात्र के फोन पर ही भुगतान की मांग की। CBI ने उन छात्रों के घरों पर छापे मारे जिन्होंने पेपर खरीदा था, जहाँ वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया का खुलासा हुआ।
लातूर में स्कूल और कॉलेज की योजना
शिवराज मोटेगांवकर, जिसे इस मामले में गिरफ्तार किया गया है, लातूर में 8 एकड़ ज़मीन पर एक स्कूल और कॉलेज खोलने की योजना बना रहा था। CBI उनके फंड के स्रोत, ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
आरोपियों की न्यायिक हिरासत
दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने पांच आरोपियों को 2 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। शुभम खैरनार की CBI रिमांड को पांच दिनों के लिए बढ़ा दिया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET परीक्षा की दोबारा तैयारी का जायज़ा लिया और नकली Telegram चैनलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
NEET परीक्षा की नई तिथि
NEET-UG परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। 7 मई को परीक्षा में गड़बड़ियों की रिपोर्ट मिलने के बाद, इसे रद्द कर दिया गया और 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
