NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकों में महत्वपूर्ण बदलाव: एक संतुलित दृष्टिकोण की ओर
NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकों में बदलाव
हाल ही में NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकों में कुछ महत्वपूर्ण और सकारात्मक परिवर्तन किए गए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेता सुनील अंबेकर ने बताया कि मुग़ल सम्राट अकबर और मैसूर के शासक टीपू सुलतान के नामों से "महान" शब्द हटा दिया गया है। यह निर्णय भारतीय इतिहास के सटीक और संतुलित दृष्टिकोण की मांग को आगे बढ़ाता है।
अंबेकर ने एक कार्यक्रम में कहा कि ये बदलाव NCERT द्वारा कई कक्षाओं के पाठ्यपुस्तकों में लागू किए गए हैं। ये संशोधन कक्षा 9, 10 और 12 में अगले वर्ष से लागू होंगे। ये परिवर्तन नई पीढ़ी को इतिहास की पूरी सच्चाई से अवगत कराने में मदद करेंगे। RSS नेता ने स्पष्ट किया कि किसी भी ऐतिहासिक व्यक्ति को पाठ्यपुस्तकों से पूरी तरह से हटाया नहीं गया है, बल्कि उनके अच्छे और बुरे कार्यों का निष्पक्ष मूल्यांकन प्रस्तुत किया गया है।
इतिहास पाठ्यपुस्तकों में सकारात्मक बदलाव
सुनील अंबेकर के अनुसार, NCERT इतिहास पाठ्यपुस्तकों से "महान" जैसे विशेषण हटा दिए गए हैं। यह निर्णय इस विचार पर आधारित है कि किसी भी शासक को "महान" कहने से पहले उनके कार्यों और भारतीय समाज पर उनके प्रभाव का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
नई पीढ़ी को सटीक और संतुलित इतिहास सिखाया जाएगा
NCERT ने ये संशोधन नई शिक्षा नीति 2020 के निर्देशों के तहत किए हैं। अंबेकर ने स्पष्ट किया कि इससे इतिहास का सही और संतुलित प्रस्तुतीकरण सुनिश्चित होगा। छात्रों को केवल शासकों की सफलताओं के बारे में नहीं, बल्कि उनके शासन के दौरान किए गए क्रूर कार्यों के बारे में भी बताया जाएगा। इतिहास को केवल प्रशंसा के दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसके पूरे प्रभाव को समझना चाहिए।
कौन-कौन सी कक्षाओं के पाठ्यपुस्तकों में बदलाव किया गया?
यह दावा किया गया है कि NCERT ने कुल 15 कक्षाओं में से 11 कक्षाओं में ये सकारात्मक परिवर्तन लागू किए हैं। कक्षा 9, 10 और 12 के पाठ्यपुस्तकों में ये संशोधन अगले शैक्षणिक वर्ष से पूरी तरह से लागू होंगे। यह परिवर्तन धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है, जिससे छात्रों और शिक्षकों के लिए नए पाठ्यक्रम के अनुकूलन में आसानी हो।
प्राचीन भारतीय ज्ञान पर जोर
RSS नेता सुनील अंबेकर ने इतिहास के साथ-साथ प्राचीन भारतीय ज्ञान और कौशल के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय का उदाहरण दिया, जिसने साहित्य के अलावा 76 कौशल आधारित पाठ्यक्रम प्रदान किए। यह दर्शाता है कि नया पाठ्यक्रम प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपराओं और सभ्यता के मूल्यों पर अधिक जोर देगा, जिससे छात्रों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस होगा।
