IIT बॉम्बे ने न्यूक्लियर इंजीनियरिंग प्रोग्राम की शुरुआत की
न्यूक्लियर इंजीनियरिंग में नई दिशा
तकनीकी विकास और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, इंजीनियरिंग शिक्षा एक नए युग में प्रवेश कर रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हरित ऊर्जा, और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में प्रगति के बाद, अब न्यूक्लियर इंजीनियरिंग को प्राथमिकता दी जा रही है। इस दिशा में, IIT बॉम्बे ने एक नया न्यूक्लियर इंजीनियरिंग कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है। यह पहल SHANTI अधिनियम के तहत की जा रही है, जिसका उद्देश्य भारत के न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और विशेषज्ञता को बढ़ावा देना है। यह कार्यक्रम छात्रों को उभरती प्रौद्योगिकियों में करियर बनाने के नए अवसर प्रदान करेगा।
यह कार्यक्रम 'सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया' (SHANTI) अधिनियम, 2025 के तहत शुरू किया जाएगा। इसे संस्थान के ग्रीन एनर्जी और सस्टेनेबिलिटी हब (GESH) द्वारा संचालित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य न्यूक्लियर ऊर्जा क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देना है, जिससे देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नई प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जा सके।
थोरियम अनुसंधान और आधुनिक प्रयोगशालाओं पर ध्यान
इस नए पाठ्यक्रम में थोरियम आधारित न्यूक्लियर प्रौद्योगिकी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडार में से एक है, जिससे इस क्षेत्र में अनुसंधान की अपार संभावनाएं हैं। कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए, कई विभाग—जैसे कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग, एनर्जी साइंस, मेटालर्जिकल और मटेरियल साइंस, और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग—सहयोग करेंगे। इसके अलावा, छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए एक उन्नत न्यूक्लियर मापन प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी।
प्रवेश प्रक्रिया और अन्य विवरण
वर्तमान में, संस्थान ने प्रवेश प्रक्रिया, आवेदकों के लिए पात्रता मानदंड, या उपलब्ध सीटों की संख्या के बारे में कोई स्पष्टता नहीं दी है। इन पहलुओं से संबंधित विवरण बाद में घोषित किए जाएंगे। इच्छुक छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक IIT बॉम्बे वेबसाइट पर नियमित रूप से अपडेट के लिए चेक करते रहें।
