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IIT मद्रास के प्रोफेसर वी. बालाकृष्णन: सरलता में गहराई का उदाहरण

IIT मद्रास के प्रोफेसर वी. बालाकृष्णन ने पिछले 17 वर्षों से क्लासिकल फिजिक्स के लेक्चर्स को एक अनोखे तरीके से प्रस्तुत किया है। उनके शिक्षण में न तो महंगे उपकरण हैं और न ही जटिल नोट्स, बल्कि केवल चॉक और एक ब्लैकबोर्ड। उनका 'फर्स्ट प्रिंसिपल्स' तरीका छात्रों को फिजिक्स की बुनियादी बातों से जोड़ता है, जिससे जटिल विषय भी सरल लगते हैं। उनके लेक्चर्स NPTEL पर उपलब्ध हैं और दुनिया भर के छात्रों द्वारा सराहे जाते हैं।
 

प्रोफेसर वी. बालाकृष्णन का अनोखा शिक्षण तरीका


आज के डिजिटल युग में, जहां ऑनलाइन कक्षाओं में एनीमेशन और हाई-टेक उपकरणों का उपयोग बढ़ रहा है, IIT मद्रास के प्रोफेसर वी. बालाकृष्णन एक अलग ही उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। पिछले 17 वर्षों से उनके क्लासिकल फिजिक्स के लेक्चर्स यूट्यूब और NPTEL प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जो बिना किसी शोर-शराबे के छात्रों को आकर्षित कर रहे हैं।


फिजिक्स की गहराई को सरलता से समझाते हैं

प्रोफेसर बालाकृष्णन कक्षा में केवल चॉक लेकर आते हैं। उनके पास न तो नोट्स होते हैं, न लैपटॉप, और न ही कोई स्लाइड। वे सीधे हरे ब्लैकबोर्ड के सामने खड़े होकर पढ़ाना शुरू करते हैं। अगले 50 से 60 मिनट तक वे लगातार बोलते हैं, और हर कॉन्सेप्ट को इतनी सरलता से समझाते हैं कि छात्र मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।


उनका शिक्षण तरीका 'फर्स्ट प्रिंसिपल्स' पर आधारित है, जिसका अर्थ है कि वे फिजिक्स की बुनियादी बातों से शुरुआत करते हैं। यहाँ कोई रट्टा नहीं, केवल तर्क और समझ होती है। हर फॉर्मूला और विचार इतनी स्पष्टता से जुड़ता है कि जटिल विषय भी सरल लगने लगते हैं।


सादगी में है शक्ति

प्रोफेसर बालाकृष्णन के लेक्चर्स की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी है। जबकि आजकल महंगे कोर्स और बड़े दावों का चलन है, उनके वीडियो केवल एक साधारण कक्षा में रिकॉर्ड किए गए हैं। फिर भी, इनकी गुणवत्ता इतनी उत्कृष्ट है कि विदेशी छात्रों ने भी उनकी सराहना की है। एक विदेशी फिजिक्स छात्र ने कहा कि इन मुफ्त लेक्चर्स से बेहतर समझ किसी भी पेड कोर्स से नहीं मिलती।


NPTEL के माध्यम से उपलब्ध ये लेक्चर्स इंजीनियरिंग और फिजिक्स के छात्रों के लिए एक वरदान साबित हो रहे हैं। भारत के अलावा, अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों के छात्र इन वीडियोज का उपयोग कर रहे हैं। प्रोफेसर की स्पष्ट आवाज और गहरी समझ से यह प्रतीत होता है कि पूरी फिजिक्स उनके दिमाग में पहले से ही छपी हुई है।