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CBSE ने स्कूलों में काउंसलिंग और करियर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य की

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने सभी स्कूलों में काउंसलिंग और करियर काउंसलर की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया है। हर 500 छात्रों पर एक काउंसलर की आवश्यकता होगी, जिससे छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन मिल सके। इस नए नियम के तहत, स्कूलों को दो भूमिकाओं के लिए नियुक्तियां करनी होंगी: काउंसलिंग और वेलनेस टीचर तथा करियर काउंसलर। जानें इन पदों के लिए आवश्यक योग्यताएं और नियम।
 
CBSE ने स्कूलों में काउंसलिंग और करियर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य की

सीबीएसई का नया नियम: काउंसलिंग और करियर काउंसलर की आवश्यकता

हाल ही में, सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने सभी शैक्षणिक संस्थानों में काउंसलिंग और वेलनेस टीचर के साथ-साथ करियर काउंसलर की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया है। हर 500 छात्रों पर एक काउंसलर की नियुक्ति आवश्यक होगी। यह निर्णय सीबीएसई स्कूलों के लिए एक नया नियम है। बोर्ड ने अपने एफिलिएशन बायलॉज 2018 में संशोधन किया है। यह जानकारी स्कूलों, छात्रों और उनके अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण है, ताकि वे जान सकें कि उनके बच्चे जिस स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं, वहां इन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।

CBSE समाचार: छात्र-शिक्षक अनुपात 1:500, दो भूमिकाएं

सीबीएसई के अनुसार, प्रत्येक 500 छात्रों पर एक काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी, जिससे काउंसलर-छात्र अनुपात 1:500 होगा। स्कूलों में काउंसलिंग और वेलनेस टीचर, जो सोशियो-इमोशनल काउंसलर के रूप में कार्य करेंगे, और करियर काउंसलर की नियुक्ति अब सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों में अनिवार्य है। यह संशोधन सीबीएसई एफिलिएशन कमिटी की सिफारिशों और गवर्निंग बॉडी की मंजूरी के बाद लागू किया गया है। नए नियमों के तहत, हर सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी सीबीएसई स्कूल को दो अलग-अलग भूमिकाओं के लिए नियुक्तियां करनी होंगी।

  - पहली भूमिका- काउंसलिंग और वेलनेस टीचर (सोशियो-इमोशनल काउंसलर)

  - दूसरी भूमिका - करियर काउंसलर

कौन होगा सीबीएसई काउंसलिंग और वेलनेस टीचर?

इस पद के लिए साइकोलॉजी (क्लिनिकल/काउंसलिंग/एप्लाइड/एजुकेशनल) में ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन होना आवश्यक है, या मानसिक स्वास्थ्य/काउंसलिंग में सोशल वर्क की डिग्री होनी चाहिए। इसके अलावा, किसी भी विषय में यूजी/पीजी डिग्री के साथ स्कूल में डिप्लोमा भी आवश्यक है। इन्हें सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान, अभिभावक-शिक्षक संवेदनशीलता और प्राइवेसी जैसे क्षेत्रों का ज्ञान होना चाहिए।

सीबीएसई करियर काउंसलर कौन होगा?

करियर काउंसलर के लिए ह्यूमैनिटीज, साइंस, सोशल साइंस, मैनेजमेंट, एजुकेशन या टेक्नोलॉजी में बैचलर्स/मास्टर्स डिग्री आवश्यक होगी। इन्हें करियर असेसमेंट, उच्च शिक्षा (भारत और वैश्विक स्तर) की जानकारी, रिसर्च स्किल्स और छात्रों-परिवारों को करियर गाइडेंस देने में सक्षम होना चाहिए।

दोनों पदों पर नियुक्त व्यक्तियों को कम से कम 50 घंटे के कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम (CBPs) भी पूरे करने होंगे। सीबीएसई ने यह भी स्पष्ट किया है कि जहां करियर काउंसलर उपलब्ध नहीं हैं, वहां स्कूल अस्थायी रूप से किसी प्रशिक्षित शिक्षक को नामित कर सकता है, लेकिन उसे दो शैक्षणिक सत्रों के भीतर निर्धारित योग्यता पूरी करनी होगी।