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CBSE के नए दिशा-निर्देश: स्कूलों की जानकारी अब ऑनलाइन उपलब्ध

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत माता-पिता अब स्कूलों की वेबसाइट पर शिक्षकों की योग्यताओं और अनुभव की जानकारी देख सकेंगे। यह कदम स्कूलों की पारदर्शिता को बढ़ाने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए उठाया गया है। नए नियमों के अनुसार, स्कूलों को छात्र-शिक्षक अनुपात का पालन करना होगा और सभी आवश्यक जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध करानी होगी। जानें इस बदलाव के पीछे का उद्देश्य और इसके लाभ।
 
CBSE के नए दिशा-निर्देश: स्कूलों की जानकारी अब ऑनलाइन उपलब्ध

CBSE द्वारा जारी नए दिशा-निर्देश



केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों के लिए एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें सख्त दिशा-निर्देश दिए गए हैं। ये नए नियम छात्र प्रवेश और स्कूलों की पारदर्शिता पर सीधा प्रभाव डालेंगे। अब माता-पिता अपने बच्चों का नामांकन करने से पहले स्कूल की सभी जानकारी ऑनलाइन देख सकेंगे, जिसमें शिक्षकों की जानकारी और उनकी योग्यताएँ शामिल हैं।


CBSE के सर्कुलर के अनुसार, हर संबद्ध स्कूल को अपने आधिकारिक वेबसाइट पर अपने शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यताओं, पेशेवर प्रशिक्षण, अनुभव और नियुक्ति तिथियों की जानकारी स्पष्ट रूप से अपलोड करनी होगी। बोर्ड का मानना है कि शिक्षा की गुणवत्ता शिक्षकों की योग्यताओं और उपलब्धता से सीधे संबंधित है। इसलिए, अब केवल स्कूल की प्रतिष्ठा या प्रभावशाली बुनियादी ढांचे के आधार पर स्कूल का चयन करना पर्याप्त नहीं होगा। यह महत्वपूर्ण होगा कि माता-पिता यह जानें कि उनके बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक की योग्यताएँ क्या हैं।


नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्कूलों को छात्र-शिक्षक अनुपात, विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता और निर्धारित न्यूनतम योग्यताओं का पालन करना होगा। यदि किसी स्कूल में आवश्यक संख्या से कम शिक्षक या अयोग्य शिक्षक पाए जाते हैं, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इसमें चेतावनियों से लेकर स्कूल की संबद्धता को प्रभावित करने तक के उपाय शामिल हैं।


माता-पिता के लिए पूर्ण जानकारी

CBSE ने यह कदम उठाया है ताकि माता-पिता को स्कूल चुनते समय सटीक और पूर्ण जानकारी मिल सके। अक्सर, स्कूल प्रवेश के दौरान उत्कृष्ट सुविधाओं का दावा करते हैं, लेकिन कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की योग्यताओं के बारे में कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं होती।


बोर्ड ने अब इस प्रथा को समाप्त करने का निर्णय लिया है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह नियम माता-पिता के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा। अब वे स्कूल की वेबसाइट पर यह देख सकेंगे कि उनके बच्चे को पढ़ाने वाला शिक्षक प्रशिक्षित है, संबंधित विषय में डिग्री रखता है और उसके पास पर्याप्त अनुभव है।


वेबसाइट रखरखाव की आवश्यकता

CBSE के सर्कुलर में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी संबद्ध स्कूलों को अपनी वेबसाइट बनानी और बनाए रखनी होगी। आवश्यक जानकारी जैसे भवन विवरण, बुनियादी ढांचा, प्रयोगशालाएँ, शिक्षक, शिक्षक की योग्यताएँ, छात्र-शिक्षक अनुपात और स्थानांतरण सूचियाँ ऑनलाइन रखी जानी चाहिए। स्कूलों को इस जानकारी को नियमित रूप से अपडेट करने की सलाह दी गई है।


स्कूलों को एक वार्षिक रिपोर्ट तैयार करनी होगी जिसमें सभी अद्यतन विवरण और उपलब्धियाँ शामिल होंगी। यह रिपोर्ट हर साल 15 सितंबर से पहले ऑनलाइन अपडेट की जाएगी।