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45 वर्षीय रेनू हंस ने 10वीं की परीक्षा में 82% अंक प्राप्त कर नया उदाहरण पेश किया

जम्मू की 45 वर्षीय रेनू हंस ने 10वीं कक्षा की परीक्षा में 82 प्रतिशत अंक प्राप्त कर एक नई मिसाल कायम की है। सुनने और बोलने में असमर्थ होने के बावजूद, उन्होंने 22 साल बाद अपने अधूरे सपने को पूरा किया। उनके बेटे नमन ने उनकी पढ़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे रेनू ने आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दी। जानें उनकी प्रेरणादायक यात्रा के बारे में।
 

प्रेरणादायक यात्रा:


जब अधिकांश लोग अपने सपनों को छोड़ देते हैं, तब जम्मू की रेनू हंस ने एक नई मिसाल कायम की है। 45 वर्षीय रेनू ने जेकेबीओएसई की 10वीं कक्षा की परीक्षा 82 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की है। सुनने और बोलने में असमर्थ होने के बावजूद, यह सफलता उनके लिए विशेष है, क्योंकि 22 साल पहले उनका पढ़ाई का सपना अधूरा रह गया था.


परिवार की कठिनाइयाँ

रेनू का परिवार 1990 के दशक में कुलगाम से जम्मू के रूप नगर में स्थानांतरित हुआ। शादी से पहले उन्होंने 10वीं की परीक्षा दी थी, लेकिन असफल रहीं। शादी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उनकी पढ़ाई रुक गई। उनके पति बबलू कौल भी सुनने और बोलने में असमर्थ हैं और घर से सिलाई का काम करते हैं। लंबे समय बाद, रेनू ने फिर से पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया।


बेटे का समर्थन

रेनू के बेटे नमन कौल ने उनकी पढ़ाई को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी ली। नमन, जो 12वीं कक्षा में साइंस स्ट्रीम के छात्र हैं, ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ मां को पढ़ाना भी शुरू किया। उन्होंने शाम के समय को पढ़ाई के लिए निर्धारित किया और इशारों के माध्यम से रेनू के सवालों का समाधान किया। नमन का यह समर्थन रेनू के लिए बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ।


परीक्षा की तैयारी

नमन ने केवल घर पर पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने बोर्ड ऑफिस जाकर रेनू का रजिस्ट्रेशन भी कराया, ताकि वह निजी अभ्यर्थी के रूप में परीक्षा दे सकें। रेनू ने परीक्षा की तैयारी जारी रखी, और वर्षों पहले अधूरी रह गई पढ़ाई को फिर से शुरू करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने मेहनत जारी रखी।


परीक्षा केंद्र पर आत्मविश्वास

अप्रैल में परीक्षा देने के लिए रेनू परीक्षा केंद्र पहुंचीं, जहां उन्हें छोटे उम्र के छात्रों को देखकर थोड़ी घबराहट हुई। लेकिन, बेटे के हौसले ने उनका आत्मविश्वास बनाए रखा। उन्होंने सभी पेपर आत्मविश्वास के साथ दिए। सितंबर में जब जेकेबीओएसई की 10वीं का परिणाम आया, तो रेनू और उनके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। 45 वर्ष की आयु में 82 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उन्होंने अपना अधूरा सपना पूरा किया।


22 साल के इंतजार का फल

रेनू हंस की कहानी केवल परीक्षा पास करने तक सीमित नहीं है। यह उस जिद और हिम्मत की कहानी है, जिसने 22 साल बाद उनके सपने को फिर से जीवित किया। इस सफर में बेटे नमन की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। अपनी 12वीं की पढ़ाई के साथ मां को पढ़ाना और परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराना उनके प्रयास का हिस्सा रहा। रेनू की सफलता ने परिवार के लिए खुशी का एक खास अवसर प्रदान किया।