हरियाणा में शिक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार: स्मार्ट किताबें और आभासी प्रयोगशालाएँ
हरियाणा में शिक्षा में तकनीकी बदलाव
हरियाणा में शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। हरियाणा स्कूल शिक्षा बोर्ड अब छात्रों के लिए सीखने को और अधिक सरल और इंटरैक्टिव बनाने की तैयारी कर रहा है। नए शैक्षणिक सत्र से, कक्षा 9 से 12 के छात्रों को "स्मार्ट किताबें" प्रदान की जाएंगी, जिनमें QR कोड के माध्यम से डिजिटल सामग्री उपलब्ध होगी।
स्मार्ट किताबों की विशेषताएँ
इन किताबों की एक प्रमुख विशेषता यह है कि प्रत्येक प्रश्न के साथ एक QR कोड होगा। यदि कोई छात्र किसी प्रश्न को समझने में कठिनाई महसूस करता है, तो वह कोड को स्कैन करके उस विषय पर वीडियो लेक्चर देख सकता है। इससे छात्रों को हर सवाल के लिए शिक्षकों पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होगी, और वे अपनी गति से अध्ययन कर सकेंगे।
आभासी प्रयोगशालाएँ और AI का समावेश
डॉ. पवन कुमार, बोर्ड के अध्यक्ष के अनुसार, छात्रों को स्मार्ट किताबों के साथ आभासी प्रयोगशालाओं तक पहुँच भी प्रदान की जाएगी। इस सुविधा के माध्यम से, छात्र तकनीकी प्रयोगों, इंटरनेट, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संबंधित जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। ये किताबें वर्तमान में अंतिम चरण में हैं और जल्द ही छात्रों तक पहुँचेंगी।
त्रिभाषी नीति का कार्यान्वयन
नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार, अब त्रिभाषी नीति लागू की जाएगी। कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए हिंदी और अंग्रेजी के साथ एक अतिरिक्त भाषा—संस्कृत, पंजाबी, या उर्दू—का अध्ययन अनिवार्य होगा। यह कदम छात्रों की भाषाई दक्षता को मजबूत करेगा।
छात्रों का मूल्यांकन अब छह विषयों पर आधारित होगा, जबकि पहले यह पांच विषयों पर होता था। इससे छात्रों के मूल्यांकन में व्यापकता आएगी।
विशेष आवश्यकताओं वाले छात्रों के लिए प्रावधान
हरियाणा बोर्ड ने बधिर, मूक, या अन्य विकलांगताओं वाले छात्रों के लिए विशेष उपाय किए हैं। राज्य के आठ विशेष स्कूलों में पढ़ने वाले ऐसे छात्रों के लिए एक अलग शैक्षणिक योजना लागू की जाएगी। उन्हें भाषा चयन में छूट दी जाएगी, और भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) को एक विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। यह पहल विकलांग छात्रों के लिए शिक्षा को अधिक सुलभ और समावेशी बनाएगी।
