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सुरभि गांधी: कठिनाइयों को पार कर सीए बनने की प्रेरणादायक यात्रा

सुरभि गांधी की यात्रा एक प्रेरणादायक कहानी है, जिसमें उन्होंने कठिनाइयों का सामना करते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का सपना पूरा किया। उनके संघर्ष और दृढ़ता ने उन्हें न केवल सीए बनने में मदद की, बल्कि उन्होंने एक लाख से अधिक छात्रों को मार्गदर्शन भी दिया। जानें कैसे उन्होंने अपने रिश्तेदारों के तानों को चुनौती में बदला और 14 घंटे की पढ़ाई के रूटीन से सफलता हासिल की।
 

प्रेरणादायक यात्रा:


सफलता की ओर बढ़ते समय कई बार सबसे बड़ी बाधा कठिन परीक्षाएं नहीं होती, बल्कि लोगों की सोच और उनके ताने होते हैं। मुंबई की सुरभि गांधी की कहानी भी इसी तरह की है। एक समय था जब उनके अपने ही उनकी क्षमताओं और पसंद पर सवाल उठाते थे। उन्हें सीए की पढ़ाई छोड़कर ड्राइंग या पेंटिंग करने की सलाह दी गई थी। लेकिन सुरभि ने इन बातों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।


कुछ बड़ा करने की चाहत

सुरभि गांधी एक मारवाड़ी जैन परिवार से हैं। उनका बचपन काफी शांत और अंतर्मुखी था। स्कूल में उनके पास ज्यादा दोस्त नहीं थे और वह अकेले समय बिताना पसंद करती थीं। हालांकि, इसी आदत ने उन्हें खुद को समझने और जीवन में कुछ अलग करने का अवसर दिया। उनके मन में अपनी अलग पहचान बनाने की इच्छा धीरे-धीरे मजबूत होती गई।


दोस्तों को देखकर चुना चार्टर्ड अकाउंटेंट का रास्ता

12वीं कक्षा के बाद सुरभि को यह स्पष्ट नहीं था कि उन्हें किस क्षेत्र में करियर बनाना है। उनके कई दोस्त चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे थे। उन्हें देखकर सुरभि ने भी सीए की पढ़ाई शुरू की। शुरुआत में उन्हें अपनी क्षमताओं पर विश्वास नहीं था, लेकिन फाउंडेशन परीक्षा पास करने के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ने लगा।


रिश्तेदार के ताने ने बदला नजरिया

सुरभि के लिए सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब एक रिश्तेदार ने उनकी पसंद और क्षमताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुरभि फैशन में लगी रहती हैं और उन्हें सीए छोड़कर ड्राइंग या पेंटिंग करनी चाहिए। उनके अनुसार, सुरभि सीए नहीं बन पाएंगी। यह बात सुरभि को चुभी, लेकिन उन्होंने इसे हार मानने की बजाय खुद को साबित करने की चुनौती के रूप में लिया।


14 घंटे पढ़ाई का रूटीन

सीए इंटरमीडिएट की तैयारी उनके लिए आसान नहीं रही। लंबी कक्षाओं और कठिन विषयों के बीच कई बार उन्हें अपने फैसले पर संदेह हुआ। पहली बार परीक्षा में असफल होने के बाद वह मानसिक दबाव से गुजरीं। इसके बाद उन्होंने तीन महीने तक बेहद अनुशासित दिनचर्या अपनाई। उन्होंने फोन और सोशल मीडिया से दूरी बना ली, सुबह चार बजे उठने लगीं और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अपने कमरे से बिस्तर तक हटा दिया।


2022 में मिली मेहनत की सबसे बड़ी जीत

लगातार मेहनत का परिणाम साल 2022 में सामने आया, जब सुरभि ने सीए इंटरमीडिएट के दोनों ग्रुप एक साथ पास कर लिए। सीए बनने के बाद उन्होंने फाइनेंस, फिटनेस और लाइफस्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया। वह Pro-Firo की संस्थापक बनीं और एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों को मार्गदर्शन दिया। उनका मानना है कि बड़ी सफलता के लिए सामान्य से अधिक प्रयास करना पड़ता है। वह युवाओं को खुद पर भरोसा रखने और दूसरों के तानों से न डरने का संदेश देती हैं।