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सुप्रीम कोर्ट में CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पर सुनवाई की, जिसमें छात्रों की निराशा और पारदर्शिता के मुद्दों पर चर्चा की गई। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से सहायता मांगी और एक जनहित याचिका पर विचार किया, जिसमें OSM प्रणाली के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग की गई। यदि कोर्ट नए नियमों का निर्देश देती है, तो इसका आगामी CBSE परीक्षाओं पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
 

CBSE OSM सिस्टम पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई



CBSE का ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने छात्रों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की, यह बताते हुए कि इस प्रणाली के प्रति छात्रों में काफी निराशा और असंतोष है।


सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर केंद्रीय सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की सहायता भी मांगी। सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश सुर्या कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि छात्रों की निराशा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


CBSE के OSM से संबंधित मुद्दा क्या है?


सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इसमें केंद्रीय सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से OSM प्रणाली के लिए स्पष्ट नियम और दिशानिर्देश बनाने का निर्देश मांगा गया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और छात्रों के अनुकूल बनाया जाना चाहिए।


छात्रों की असंतोष पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ


सुप्रीम कोर्ट ने युवा छात्रों के बीच निराशा की गहराई पर टिप्पणी की। इसके परिणामस्वरूप, कोर्ट ने तुषार मेहता की सहायता लेने का निर्णय लिया ताकि सभी दृष्टिकोणों को ध्यान में रखते हुए समाधान खोजा जा सके।


CBSE का OSM सिस्टम क्या है?


ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है। इस प्रक्रिया के तहत, परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएँ पहले स्कैन की जाती हैं। फिर शिक्षक इन स्कैन की गई प्रतियों को कंप्यूटर स्क्रीन पर देखकर अंक देते हैं; उन्हें मूल्यांकन के लिए भौतिक उत्तर पुस्तिकाएँ नहीं दी जातीं।


CBSE का कहना है कि यह प्रक्रिया मूल्यांकन को तेज करती है, सुरक्षित रिकॉर्ड-कीपिंग सुनिश्चित करती है, और मॉडरेशन जैसी प्रक्रियाओं को सरल बनाती है। हालांकि, कुछ छात्रों और विशेषज्ञों ने इस प्रणाली से संबंधित पारदर्शिता और तकनीकी मुद्दों पर लगातार सवाल उठाए हैं।


कोर्ट के निर्णय का छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?


फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम निर्णय नहीं दिया है। हालांकि, कोर्ट की टिप्पणियाँ स्पष्ट करती हैं कि यह छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रहा है। यदि कोर्ट बाद में नए नियमों के निर्माण या मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव का निर्देश देती है, तो इसका आगामी CBSE परीक्षाओं और मूल्यांकन प्रणाली पर प्रभाव पड़ सकता है।