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शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों से छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार

शिक्षा मंत्रालय के हालिया आंकड़ों के अनुसार, छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार हुआ है, जिससे शिक्षकों को छात्रों पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिला है। पिछले 12 वर्षों में, सभी स्तरों पर छात्रों की संख्या प्रति शिक्षक में कमी आई है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि हुई है। आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। जानें इस सुधार के पीछे के कारण और इसके प्रभावों के बारे में।
 

छात्र-शिक्षक अनुपात में गिरावट


शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक छात्रों की संख्या प्रति शिक्षक में कमी आई है।


पिछले 12 वर्षों में देश के स्कूल प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार देखने को मिले हैं। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी छात्र-शिक्षक अनुपात के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि सभी स्तरों पर छात्रों की संख्या प्रति शिक्षक में कमी आई है। मंत्रालय का कहना है कि इससे शिक्षकों को प्रत्येक छात्र पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलेगा, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।


चार स्तरों पर छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार

शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में सभी स्कूल स्तरों पर छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार हुआ है। प्राथमिक स्तर पर, यह अनुपात 2013-14 में 31 छात्रों के लिए 1 शिक्षक से घटकर 2025-26 में 19 छात्रों के लिए 1 शिक्षक हो गया। इसी तरह, उच्च प्राथमिक स्तर पर, यह अनुपात 25 से घटकर 17 हो गया। माध्यमिक स्तर पर, यह अनुपात 25 से घटकर 15 हो गया। उच्च माध्यमिक स्तर पर, यह अनुपात 40 से घटकर 23 हो गया।


शिक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में छात्र-शिक्षक अनुपात में सुधार ने प्रत्येक छात्र को अधिक व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करने में मदद की है। इससे शिक्षण प्रक्रिया को मजबूत किया गया है और कक्षा में बेहतर सीखने का माहौल तैयार हुआ है।


राज्यों में भी सुधार

केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों के अलावा, कई राज्यों ने भी सरकारी स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार के लिए कदम उठाए हैं। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश ने पिछले दशक में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्च विद्यालय स्तर पर शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार दर्ज किया है। शिक्षकों की संख्या बढ़ाने और स्कूलों में रिक्तियों को भरने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे सभी छात्रों के लिए बेहतर शिक्षण-सीखने का माहौल सुनिश्चित किया जा सके। आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा जारी नवीनतम सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक-छात्र अनुपात 2014-15 में 1:26 था, जो 2024-25 में 1:20 तक सुधारित हो गया है, अर्थात अब हर 20 छात्रों के लिए 1 शिक्षक है।