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शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता पर सरकार का स्पष्ट बयान

केंद्र सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर संसद में स्पष्ट किया है कि इसे समाप्त करने या शिक्षकों को छूट देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि सभी नियम NCTE द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार लागू रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय है, उन्हें TET उत्तीर्ण करना होगा। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है और TET का महत्व क्या है।
 

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की स्थिति


केंद्र सरकार ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के संबंध में स्पष्ट किया है कि इस परीक्षा की अनिवार्यता को समाप्त करने या शिक्षकों को इससे छूट देने का कोई विचार नहीं है। केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने संसद में बताया कि TET से जुड़े सभी नियम राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानकों के अनुसार लागू रहेंगे। इस प्रकार, वर्तमान नियमों में किसी भी प्रकार के परिवर्तन का प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है।


सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद की स्थिति

हाल के समय में TET को लेकर चर्चा उस समय बढ़ी जब सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत कार्यरत उन शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए, जिन्होंने अभी तक TET पास नहीं किया है। अदालत ने कहा कि जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय है, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर TET उत्तीर्ण करना होगा। इसके बाद, अदालत ने परीक्षा उत्तीर्ण करने की अंतिम तिथि को 31 अगस्त 2028 तक बढ़ा दिया और राज्यों को हर वर्ष कम से कम दो बार TET आयोजित करने का निर्देश दिया।


सरकार का जवाब

संसद में एक सवाल के जवाब में, सरकार ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, TET केवल नियुक्ति के लिए नहीं, बल्कि पदोन्नति के लिए भी आवश्यक है। इसलिए, जिन शिक्षकों पर यह नियम लागू होता है, उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी।


TET का महत्व

केंद्र सरकार के अनुसार, TET का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति को बढ़ावा देना है। NCTE ने इसे शिक्षकों की न्यूनतम पात्रता का एक महत्वपूर्ण मानदंड माना है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, यह व्यवस्था मुख्य रूप से उन शिक्षकों पर लागू होगी, जिनकी नियुक्ति RTE व्यवस्था लागू होने से पहले हुई थी और जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी पांच वर्ष से अधिक समय बाकी है। वहीं, जिन शिक्षकों की सेवा अवधि में पांच वर्ष या उससे कम समय शेष है, उन्हें इस अनिवार्यता से छूट दी गई है। इस प्रकार, वर्तमान में TET नियमों में किसी प्रकार की ढील मिलने की संभावना नहीं है.