महत्वपूर्ण अपडेट: टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) से संबंधित राहत की उम्मीदें
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) का नया मोड़
सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद स्थिति और भी कठिन हो गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि सभी शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। लेकिन अब एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है।
शिक्षकों के लिए राहत की खबर
देशभर के लाखों सरकारी शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है। लंबे समय से टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को लेकर जो डर, तनाव और भ्रम था, वह अब समाप्त होने की उम्मीद है। यह विशेष रूप से उन शिक्षकों के लिए है जो कई वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं लेकिन विभिन्न कारणों से टीईटी पास नहीं कर पाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने लाखों प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों को सीधे प्रभावित किया। कई शिक्षक, जो 10-15 या 20 वर्षों से सेवा में थे, अचानक असुरक्षित महसूस करने लगे। उन्हें डर था कि यदि वे टीईटी पास नहीं कर पाए, तो उन्हें अपनी नौकरी खोनी पड़ सकती है या जल्दी सेवानिवृत्त होना पड़ सकता है।
शिक्षण दबाव या परीक्षा की तैयारी?
टीईटी में असफल शिक्षकों ने बार-बार यह सवाल उठाया कि उन्हें बच्चों को पढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए या अपनी नौकरी बचाने के लिए परीक्षा की तैयारी करनी चाहिए। शिक्षकों के लिए फिर से परीक्षा देना आसान नहीं है। इसलिए, शिक्षक संगठनों ने बार-बार केंद्र सरकार और राज्यों से मांग की कि पुराने और अनुभवी शिक्षकों को टीईटी से छूट दी जाए या उन्हें कुछ विशेष राहत दी जाए।
केंद्र सरकार का महत्वपूर्ण कदम
अब, केंद्र सरकार ने इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय ने 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों की पूरी जानकारी मांगी है।
शिक्षकों की संख्या और जानकारी
राज्यों को यह जानकारी 16 जनवरी तक प्रदान करनी है। इस संबंध में सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 31 दिसंबर को एक पत्र भेजा गया था। रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण जानकारियों की मांग की गई है, जैसे कि 2011 से पहले और बाद में नियुक्त शिक्षकों की संख्या, टीईटी या सीटीईटी पास करने वाले शिक्षकों की संख्या, और उन शिक्षकों की जानकारी जो अभी तक टीईटी पास नहीं कर पाए हैं।
लाखों शिक्षकों की उम्मीदें
केंद्र सरकार की यह पहल लगभग 12 लाख शिक्षकों को राहत देने की उम्मीद है। विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने अभी तक टीईटी पास नहीं किया है। उत्तर प्रदेश में लगभग 186,000 शिक्षक; राजस्थान में लगभग 80,000 तीसरे श्रेणी के शिक्षक; मध्य प्रदेश में लगभग 300,000 शिक्षक; और झारखंड में लगभग 27,000 प्राथमिक शिक्षक इस निर्णय से सीधे प्रभावित हैं।
अगला कदम क्या होगा?
अब सभी की नजरें केंद्र सरकार और राज्यों के निर्णयों पर हैं। यदि सरकार पुराने और अनुभवी शिक्षकों को टीईटी से छूट देने का निर्णय लेती है या कोई वैकल्पिक व्यवस्था लागू करती है, तो यह लाखों परिवारों को राहत प्रदान करेगा। आने वाले दिनों में सरकार का यह कदम शिक्षकों के भविष्य को आकार दे सकता है।
