मकसूद अहमद: मेवात से IPS बनने की प्रेरणादायक यात्रा
मेवात की नकारात्मक धारणाओं को चुनौती
मेवात: जब भी मेवात का नाम लिया जाता है, समाज में कई नकारात्मक धारणाएं उभरकर सामने आती हैं। इसी माहौल से बाहर निकलते हुए मकसूद अहमद ने अपनी एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र की नौकरी को छोड़कर सिविल सेवा का मार्ग चुना और अंततः IPS अधिकारी बने। उनकी कहानी केवल सरकारी नौकरी पाने की नहीं है, बल्कि उस सोच को चुनौती देने की है जो पूरे क्षेत्र और वहां के युवाओं को एक ही दृष्टिकोण से देखती है।
शिक्षा में उत्कृष्टता
मकसूद की शैक्षणिक यात्रा भी उल्लेखनीय रही। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से प्राप्त की और फिर इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इसके बाद, उन्होंने CAT परीक्षा में 97 परसेंटाइल स्कोर किया और HR में MBA की पढ़ाई की। हालांकि, शिक्षा और निजी क्षेत्र में करियर के अवसर खुलने के बावजूद, उनके मन में कुछ अलग करने की चाह बनी रही।
2013 में UPSC की तैयारी की शुरुआत
MBA के बाद मकसूद को नौकरी मिल गई थी, लेकिन समाज की नकारात्मक सोच को बदलने की इच्छा ने उन्हें एक बड़ा निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। 2013 में, उन्होंने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। लंबे समय तक बिना किसी विशेष अध्ययन पृष्ठभूमि के UPSC की तैयारी करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपनी रणनीति पर काम किया और आगे बढ़ते रहे।
पहले प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचे
UPSC की तैयारी के दौरान मकसूद को पहली बड़ी निराशा तब मिली जब वह पहले प्रयास में इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन चयनित नहीं हो सके। इस असफलता ने उन पर असर डाला, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और दोबारा तैयारी शुरू की। अपनी गलतियों को समझते हुए, उन्होंने अध्ययन की रणनीति में बदलाव किया और अगले प्रयास के लिए बेहतर तरीके से तैयार हुए।
दूसरे प्रयास में IRTS, लेकिन IPS का सपना
दूसरे प्रयास में, मकसूद ने बिना किसी कोचिंग के सफलता प्राप्त की और उनका चयन इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस (IRTS) के लिए हुआ। हालांकि, उनका लक्ष्य अभी भी पूरा नहीं हुआ था। उन्होंने IPS बनने का सपना नहीं छोड़ा और फिर से UPSC परीक्षा दी। अंततः, लगातार प्रयासों के बाद, वह 2016 बैच के हरियाणा कैडर के IPS अधिकारी बने और अपने सपने को साकार किया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
मकसूद अहमद की यात्रा का सबसे बड़ा संदेश यह है कि परिस्थितियां और समाज की धारणाएं किसी की मंजिल को निर्धारित नहीं करतीं। वह युवाओं को अपनी रुचियों के आधार पर विषय चुनने और अपने काम के प्रति समर्पित रहने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि जब व्यक्ति अपने काम को लेकर गंभीर होता है, तो बड़ी उपलब्धियों की राह खुलती है। आज उनकी कहानी कई युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
