परीक्षा में चैटिंग भाषा का प्रभाव: छात्रों की लेखन क्षमता पर सवाल
डिजिटल युग में छात्रों की भाषा
नई दिल्ली: आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन छात्रों के जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है। पढ़ाई से लेकर मनोरंजन तक, हर गतिविधि स्मार्टफोन पर निर्भर होती जा रही है। इसका प्रभाव छात्रों की पढ़ाई और लेखन की आदतों पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। यह बदलाव अब केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं में भी दिखाई दे रहा है, जिससे शिक्षकों में चिंता बढ़ गई है।
परीक्षा में असामान्य भाषा का उपयोग
कुमाऊं विश्वविद्यालय की हालिया ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट परीक्षाओं के मूल्यांकन में सामने आए मामलों ने शिक्षा प्रणाली की गंभीर स्थिति को उजागर किया है। छात्रों ने परीक्षा में पारंपरिक भाषा के बजाय चैटिंग स्लैंग का उपयोग किया है। इससे न केवल उत्तरों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि छात्रों की मूल लेखन क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
चौंकाने वाली वास्तविकता
हल्द्वानी के एमबीपीजी कॉलेज में मूल्यांकन के दौरान शिक्षकों ने कई उत्तर पुस्तिकाओं में असामान्य भाषा देखी है। उदाहरण के लिए, 'Because' के लिए 'Bcoz', 'Before' के लिए 'B4', 'Between' के लिए 'B/w' और 'And' के लिए '&' जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में 'LOL' जैसे शब्द भी पाए गए हैं, जो आमतौर पर मोबाइल चैटिंग में उपयोग होते हैं।
हाइब्रिड भाषा और अधूरे उत्तर
परीक्षकों का कहना है कि कई छात्र हिंदी और अंग्रेजी शब्दों को रोमन लिपि में मिलाकर लिख रहे हैं। छोटे सवालों के उत्तर बहुत संक्षिप्त और अधूरे हैं, जबकि लंबे सवालों में एक ही बात को घुमा-फिराकर लिखा गया है। कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में सामग्री की कमी है, जिससे छात्रों की तैयारी और समझ पर सवाल उठते हैं।
लेखन क्षमता में कमी
शिक्षकों का मानना है कि लगातार मोबाइल कीबोर्ड का उपयोग करने से छात्रों का पेन और पेपर पर अभ्यास कम हो गया है। इसका प्रभाव उनकी हैंडराइटिंग और लिखने की गति पर पड़ा है। कई उत्तर पुस्तिकाओं में अक्षर इतने अस्पष्ट हैं कि उन्हें पढ़ना मुश्किल हो रहा है। स्पेलिंग न आने पर छात्र शब्दों को रोमन में लिखने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रैक्टिस की कमी
मूल्यांकन के दौरान यह भी देखा गया कि छात्र आकृतियाँ या चार्ट तो बना देते हैं, लेकिन उनकी व्याख्या केवल दो-तीन पंक्तियों में ही सीमित रहती है। इससे विषय की गहरी समझ का अभाव स्पष्ट है। शिक्षकों के अनुसार नियमित लेखन अभ्यास की कमी इसका मुख्य कारण है, जो परीक्षा परिणामों को भी प्रभावित कर सकता है।
शिक्षकों की चिंता
एमबीपीजी कॉलेज में जनवरी से मूल्यांकन कार्य चल रहा है, जहां लगभग 62 हजार छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएँ जांची जा रही हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, जनवरी के अंत या फरवरी के पहले सप्ताह तक मूल्यांकन पूरा कर लिया जाएगा और फरवरी में परिणाम घोषित होंगे। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो भविष्य में समस्या और गंभीर हो सकती है।
