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छत्तीसगढ़ में कांस्टेबल भर्ती पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ में 6000 कांस्टेबलों की भर्ती प्रक्रिया में उच्च न्यायालय ने नए नियुक्तियों पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति पीपी साहू की पीठ ने कहा कि अगली सुनवाई तक कोई नई नियुक्ति पत्र जारी नहीं होगा। याचिकाकर्ताओं ने भर्ती में व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जिसमें शारीरिक परीक्षण में अनियमितताएँ शामिल हैं। उन्होंने सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की है। जानें इस मामले में क्या हुआ और आगे की प्रक्रिया क्या होगी।
 
छत्तीसगढ़ में कांस्टेबल भर्ती पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

भर्ती प्रक्रिया पर न्यायिक हस्तक्षेप


CG News: छत्तीसगढ़ में 6000 कांस्टेबलों की भर्ती प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप हुआ है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को नए नियुक्तियों को तुरंत रोकने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति पीपी साहू की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई या अंतिम निर्णय तक कोई नई नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार ने अदालत को सूचित किया कि लगभग 2500 चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र पहले ही वितरित किए जा चुके हैं। हालांकि, अदालत ने आगे की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया है और सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को निर्धारित की गई है।


भर्ती में व्यापक भ्रष्टाचार के आरोप

भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोप
सक्ती, बिलासपुर, रायगढ़ और मुंगेली जिलों के कई उम्मीदवारों ने इस मामले में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। याचिकाकर्ताओं में मनोहर पटेल, विवेक दुबे, मृत्युंजय श्रीवास, कामेश्वर प्रसाद, गजराज पटेल, अजय कुमार, जितेश बघेल, अश्विनी कुमार यादव और ईशान शामिल हैं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि शारीरिक परीक्षण को योजनाबद्ध तरीके से प्रभावित किया गया और निष्पक्षता का खुला उल्लंघन किया गया।


आउटसोर्सिंग कंपनी पर सवाल

आउटसोर्सिंग कंपनी पर सवाल
उम्मीदवारों का कहना है कि शारीरिक परीक्षण के दौरान डेटा रिकॉर्डिंग की जिम्मेदारी टाइम्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नामक एक आउटसोर्सिंग कंपनी को सौंपी गई थी। इस प्रक्रिया के संबंध में गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिसमें पैसे के बदले अंक बढ़ाने, नियमों की अनदेखी और पक्षपात शामिल हैं।


बिलासपुर SSP का पत्र

बिलासपुर SSP का पत्र
याचिकाकर्ताओं ने अपने तर्कों के समर्थन में 19 दिसंबर 2024 को अदालत को एक महत्वपूर्ण पत्र प्रस्तुत किया। यह पत्र बिलासपुर SSP और चयन समिति के अध्यक्ष द्वारा रायपुर पुलिस मुख्यालय को भेजा गया था। पत्र में शारीरिक परीक्षण के दौरान हुई गंभीर अनियमितताओं की आधिकारिक रिपोर्ट शामिल थी, जिसे याचिका का मजबूत आधार बताया गया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को सूचित किया कि भर्ती प्रक्रिया पूरे राज्य के लिए एक ही केंद्रीकृत विज्ञापन के तहत की जा रही है, और सभी जिलों में शारीरिक परीक्षण उसी आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा आयोजित किए गए थे। इसलिए, यह संदेह है कि बिलासपुर में हुई अनियमितताएँ अन्य जिलों में भी हुई होंगी, और इनकी जांच की आवश्यकता है।


पुलिस भर्ती नियमों का उल्लंघन

पुलिस भर्ती नियमों का उल्लंघन
याचिका में पुलिस भर्ती प्रक्रिया नियम 2007 के नियम 7 का हवाला दिया गया है। इस नियम के अनुसार, यदि भर्ती प्रक्रिया के किसी चरण में अनियमितताएँ साबित होती हैं, तो पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाना चाहिए और एक नई भर्ती प्रक्रिया आयोजित की जानी चाहिए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि अंतिम सूची और नियुक्ति आदेश जारी करना पूरी तरह से अवैध है।


129 उम्मीदवारों को अनुचित लाभ

129 उम्मीदवारों को अनुचित लाभ
वकील ने अदालत को बताया कि सरकार की प्रारंभिक जांच में 129 उम्मीदवारों के नाम सामने आए हैं, जिन्हें अनुचित रूप से उच्च अंक दिए गए। इसके परिणामस्वरूप कई योग्य उम्मीदवार चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए।


सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग

सीबीआई या स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि यदि मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा की जाती है, तो अन्य जिलों में भी भ्रष्टाचार की परतें उजागर हो सकती हैं। उनका कहना है कि इस भर्ती प्रक्रिया में योग्य उम्मीदवारों का भविष्य गंभीर रूप से खतरे में है।