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उत्तर प्रदेश में स्कूल प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव: आरटीई अधिनियम के तहत आधार कार्ड की अनिवार्यता समाप्त

उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूल प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब आरटीई अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता नहीं होगी। यह कदम गरीब और वंचित परिवारों को राहत देने के लिए उठाया गया है। नए नियमों के अनुसार, दस्तावेज़ सत्यापन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी स्तर पर होगा और स्कूल आवंटन ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया जाएगा। इस बदलाव से अधिक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
 
उत्तर प्रदेश में स्कूल प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव: आरटीई अधिनियम के तहत आधार कार्ड की अनिवार्यता समाप्त

उत्तर प्रदेश आरटीई स्कूल प्रवेश 2026


उत्तर प्रदेश सरकार ने स्कूल प्रवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब निजी अनुदानित स्कूलों में आरटीई कोटे के तहत प्रवेश के लिए बच्चों और उनके माता-पिता के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होगा। यह कदम गरीब, वंचित और कमजोर परिवारों को राहत प्रदान करने और अधिक बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से उठाया गया है।


शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, कई योग्य बच्चों को आधार से संबंधित दस्तावेजों की जटिलताओं के कारण प्रवेश से वंचित रहना पड़ा। नया सिस्टम आरटीई अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप है, जिससे वास्तविक लाभार्थियों के लिए स्कूल में प्रवेश प्राप्त करना आसान हो जाएगा।


दस्तावेज़ आवश्यकताओं में छूट
नए नियमों के तहत, आरटीई कोटे के तहत आवेदन करने के लिए बच्चे और दोनों माता-पिता के लिए आधार कार्ड की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय सहायता और प्रतिपूर्ति के लिए आधार की आवश्यकता होगी। आरटीई के तहत निजी स्कूलों को दी जाने वाली राशि केवल आधार से जुड़े बैंक खातों में स्थानांतरित की जाएगी। इसके लिए कम से कम एक माता-पिता के आधार विवरण की आवश्यकता होगी।


प्रवेश क्षमता और आयु मानदंड


सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरटीई अधिनियम की धारा 12(1)(c) के तहत, निजी स्कूल अपने प्रवेश स्तर की कक्षा में कुल सीटों का अधिकतम 25 प्रतिशत आरक्षित करेंगे। प्रत्येक जिले के लिए वार्षिक प्रवेश लक्ष्य भी निर्धारित किए जाएंगे।


आयु सीमा के संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। 3 से 4 वर्ष के बच्चे नर्सरी के लिए, 4 से 5 वर्ष के बच्चे एलकेजी के लिए, और 6 से 7 वर्ष के बच्चे कक्षा 1 के लिए पात्र होंगे। इससे सभी निजी स्कूलों में एक समान प्रणाली सुनिश्चित होगी।


प्रवेश प्रक्रिया
दस्तावेज़ सत्यापन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) स्तर पर किया जाएगा। स्कूल आवंटन फिर दो चरणों में ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। अंतिम चयन सूची जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अनुमोदित की जाएगी, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि ये सुधार आरटीई कोटे के तहत आवेदन करने वाले माता-पिता की संख्या बढ़ाएंगे। अनावश्यक बाधाओं को हटाकर, सरकार अधिक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।