अग्निपथ योजना की परीक्षा: रोजगार की संभावनाएं और चुनौतियां
अग्निपथ योजना की परीक्षा का समय
इस वर्ष के अंत तक अग्निपथ योजना की परीक्षा आयोजित होने की संभावना है। हाल ही में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम. एम. नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक में उल्लेखित मुद्दों पर सरकार से सवाल उठाए, जिससे राजनीतिक गतिरोध उत्पन्न हुआ। जनरल नरवणे की किताब में अग्निपथ योजना का भी जिक्र किया गया है।
रोजगार की संभावनाएं
इस साल के अंत में अग्निपथ योजना का पहला बैच सेवा पूरी कर बाहर आएगा। सबसे पहले नेवी के अग्निवीर बाहर निकलेंगे, जिनमें से लगभग 2600 अग्निवीर इस नवंबर में चार साल पूरे करेंगे। अगले वर्ष की शुरुआत में आर्मी और एयरफोर्स के अग्निवीरों का पहला बैच भी बाहर आएगा।
अग्निवीरों की स्थायी नियुक्ति
वर्तमान योजना के अनुसार, अग्निवीरों में से 25% को स्थायी किया जाएगा, जबकि शेष 75% को बाहर किया जाएगा। यही अग्निपथ योजना की असली परीक्षा होगी। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि बाहर होने वाले 75% युवाओं को आगे क्या रोजगार मिलेगा। सरकार ने इस संबंध में उचित प्रबंध करने का आश्वासन दिया है। कई राज्य सरकारों ने अग्निवीरों के लिए पुलिस में कुछ कोटा निर्धारित किया है।
स्थायी नियुक्ति की सिफारिशें
तीनों सेनाओं ने सिफारिश की है कि कम से कम 40% से 70% तक अग्निवीरों को स्थायी किया जाना चाहिए। हालांकि, सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह 25% से अधिक अग्निवीरों को स्थायी करने पर विचार नहीं कर रही है। यदि पहले बैच में केवल 25% को स्थायी किया जाता है और बाद में बदलाव किया जाता है, तो यह कानूनी विवादों का कारण बन सकता है।
अग्निवीरों की सहायता
यदि अग्निवीर ड्यूटी के दौरान शहीद होते हैं या विकलांग हो जाते हैं, तो उन्हें नियमित सैनिकों के समान सहायता देने की सिफारिश पहले ही की जा चुकी है, लेकिन यह मुद्दा अभी विचाराधीन है। अग्निपथ योजना पर राजनीतिक बहस जारी है, लेकिन इसकी असली परीक्षा निकट भविष्य में होने वाली है।
