विदेशी विश्वविद्यालयों का भारत में कैंपस खोलने का सपना हुआ सच
विदेश में पढ़ाई का सपना अब होगा साकार
हर साल, हजारों भारतीय छात्र विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना देखते हैं और इसके लिए स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करते हैं। वर्तमान में, सैकड़ों छात्र अमेरिका, चीन, लंदन और रूस जैसे देशों की विश्वविद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं। हालांकि, विदेश में रहने की उच्च लागत और महंगी ट्यूशन फीस कई छात्रों के लिए चुनौती बन जाती है, जिससे उनका सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन अब यह सपना सच हो सकता है, क्योंकि कई विदेशी विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। इससे छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षा अधिक किफायती दरों पर प्राप्त होगी।
UGC ने दी अनुमति
भारत सरकार उच्च शिक्षा के वैश्वीकरण की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने कई प्रमुख विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने की अनुमति दे दी है। भारत के नियामक ढांचे पर बढ़ते वैश्विक विश्वास के कारण, यूके की नौ विश्वविद्यालयें भारत में अपने कैंपस स्थापित करने के लिए तैयार हैं। सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, और अगले कुछ वर्षों में कक्षाएं शुरू हो सकती हैं।
भारत में आने वाली प्रमुख विश्वविद्यालयें
यूके के अलावा, अन्य देशों की विश्वविद्यालयें भी भारत में अपने कैंपस खोलने की योजना बना रही हैं। ये विदेशी विश्वविद्यालय बड़ी संख्या में छात्रों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने केंद्र स्थापित कर रही हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स, यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल और यूनिवर्सिटी ऑफ यॉर्क जैसे प्रमुख नाम भारत में अपनी उपस्थिति स्थापित करने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके कैंपस बेंगलुरु और मुंबई में खुल सकते हैं।
विदेशी डिग्रियों का लाभ
लाखों भारतीय छात्रों के लिए यह एक बड़ी राहत है कि अब वे अपने देश में रहकर विदेशी डिग्री प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर नौकरी के अवसर मिल सकेंगे। इसके अतिरिक्त, भारत में इन विश्वविद्यालयों की फीस तुलनात्मक रूप से कम होगी, जिससे छात्रों को विदेश में पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्चों में भी बचत होगी।
