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मध्य प्रदेश में हिंदी में इंजीनियरिंग शिक्षा की नई शुरुआत

मध्य प्रदेश के इंदौर में SGSITS ने हिंदी माध्यम से बीटेक सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया है। यह पहल उन छात्रों के लिए फायदेमंद होगी जिन्होंने हिंदी में शिक्षा प्राप्त की है और अंग्रेजी में तकनीकी विषयों को समझने में कठिनाई महसूस करते हैं। NEP 2020 के तहत मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। इस विशेष बैच में 30 सीटें हैं, जिनमें से लगभग 20 छात्रों ने दाखिला लिया है। यदि यह प्रयोग सफल होता है, तो अन्य इंजीनियरिंग शाखाओं में भी इसे लागू किया जा सकता है।
 

हिंदी माध्यम में इंजीनियरिंग की पढ़ाई


मध्य प्रदेश में हिंदी माध्यम से अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई अब और भी सुलभ हो गई है। इंदौर स्थित श्री जीएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (SGSITS) ने शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से बीटेक सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में शुरू करने का निर्णय लिया है। इसे राज्य में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ उन छात्रों को होगा, जिन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हिंदी माध्यम से प्राप्त की है और जो अंग्रेजी में तकनीकी विषयों को समझने में कठिनाई महसूस करते हैं।


अंग्रेजी की बाधा को कम करना
इंजीनियरिंग के अधिकांश पाठ्यक्रमों में अध्ययन की भाषा अंग्रेजी होती है। विशेष रूप से तकनीकी शब्दावली और जटिल अवधारणाएं कई छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले छात्रों को इस भाषा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। SGSITS की हिंदी माध्यम की पहल का उद्देश्य छात्रों को उनकी मातृभाषा में विषयों को समझने का बेहतर अवसर प्रदान करना है, ताकि भाषा शिक्षा में बाधा न बने।


NEP 2020 के अनुरूप पहल
हिंदी में तकनीकी शिक्षा की शुरुआत राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सोच से भी जुड़ी है, जिसमें मातृभाषा और भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) ने भी भारतीय भाषाओं में तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाए हैं।


अन्य भाषाओं में भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई
AICTE के अनुसार, 2021-22 में लगभग 20 संस्थानों ने हिंदी, मराठी, तेलुगु, कन्नड़ और तमिल जैसी कई भारतीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू की थी। उस समय लगभग 255 छात्रों ने इन पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया था।


इंजीनियरिंग से संबंधित किताबों का 12 भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने का कार्य भी चल रहा है।
सिविल इंजीनियरिंग से शुरुआत
SGSITS ने हिंदी माध्यम की शुरुआत सिविल इंजीनियरिंग से की है। यदि यह प्रयोग सफल होता है और छात्रों को लाभ मिलता है, तो इसे मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर साइंस जैसी अन्य शाखाओं में भी विस्तारित किया जा सकता है।


इससे विशेष रूप से उन छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है जो गांवों और छोटे कस्बों से आते हैं और जिन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा हिंदी माध्यम से पूरी की है।


30 सीटें, 20 छात्रों ने किया दाखिला
हिंदी माध्यम से शुरू किए गए इस विशेष बैच के लिए 30 सीटें निर्धारित की गई हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लगभग 20 छात्रों ने इसमें दाखिला लिया है। छात्रों की इस प्रतिक्रिया से यह संकेत मिलता है कि अपनी भाषा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई का विकल्प विद्यार्थियों के लिए आकर्षक है। यदि इस पहल का विस्तार होता है, तो हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए तकनीकी शिक्षा के नए अवसर खुल सकते हैं।