जामिया मिलिया इस्लामिया ने छात्रों के लिए आधिकारिक सोशल मीडिया ग्रुप्स की व्यवस्था की
जामिया मिलिया इस्लामिया की नई सोशल मीडिया नीति
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय ने छात्रों को शैक्षणिक गतिविधियों और अध्ययन से संबंधित जानकारी प्रदान करने के लिए अपनी सोशल मीडिया ग्रुप्स की नीति को स्पष्ट किया है। विश्वविद्यालय ने छात्रों को अनौपचारिक रूप से बनाए गए ग्रुप्स से दूर रहने की सलाह दी है।
यूनिवर्सिटी के अनुसार, हर क्लास और बैच के लिए एक आधिकारिक सोशल मीडिया ग्रुप स्थापित किया जाएगा, जिसमें विश्वविद्यालय द्वारा नामित शिक्षक को शामिल करना अनिवार्य होगा। छात्रों को आवश्यक जानकारी इन आधिकारिक ग्रुप्स के माध्यम से ही मिलेगी।
आधिकारिक ग्रुप में शिक्षक की उपस्थिति आवश्यक
नई व्यवस्था के तहत, प्रत्येक क्लास के आधिकारिक ग्रुप में छात्र प्रतिनिधि एडमिन की भूमिका निभाएगा, जबकि एक नामित शिक्षक भी ग्रुप का हिस्सा होगा। फैकल्टी मेंबर की जिम्मेदारी ग्रुप में साझा की जाने वाली सामग्री और गतिविधियों पर नजर रखना होगी। विश्वविद्यालय का उद्देश्य इन ग्रुप्स को मुख्य रूप से अध्ययन और शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित जानकारी के आदान-प्रदान तक सीमित रखना है.
अनौपचारिक ग्रुप्स से दूरी बनाने की सलाह
जामिया ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अपने स्तर पर बनाए गए अनौपचारिक सोशल मीडिया ग्रुप्स से दूर रहें। विश्वविद्यालय का कहना है कि कुछ अनौपचारिक ग्रुप्स में अकादमिक चर्चाओं के अलावा अन्य गतिविधियों की शिकायतें मिली थीं।
कुछ मामलों में आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री साझा किए जाने की भी रिपोर्ट आई थी। इसी कारण विश्वविद्यालय ने आधिकारिक ग्रुप व्यवस्था को स्पष्ट रूप से लागू करने पर जोर दिया है.
डीन और विभागाध्यक्षों को जिम्मेदारी
यूनिवर्सिटी ने सभी डीन, विभागाध्यक्षों और सेंटर डायरेक्टर्स को निर्देश दिया है कि वे अपनी कक्षाओं और बैच के लिए आधिकारिक सोशल मीडिया ग्रुप बनवाना सुनिश्चित करें।
इन ग्रुप्स में संबंधित फैकल्टी मेंबर को भी जोड़ा जाएगा। प्रशासन चाहता है कि छात्रों को पढ़ाई, कक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं एक निर्धारित आधिकारिक माध्यम से प्राप्त हों।
सितंबर 2025 में जारी हुई थी गाइडलाइन
जामिया ने स्पष्ट किया है कि यह कोई नई नीति नहीं है। विश्वविद्यालय ने पहले भी 15 सितंबर 2025 को इसी तरह के निर्देश जारी किए थे। उस समय भी छात्रों द्वारा बनाए गए अनौपचारिक ग्रुप्स को लेकर चिंता जताई गई थी।
यूनिवर्सिटी के अनुसार, कुछ ग्रुप्स का उपयोग पढ़ाई से इतर व्यक्तिगत मुद्दों और अन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। अब उसी व्यवस्था को स्पष्ट करते हुए आधिकारिक ग्रुप्स में शिक्षक की उपस्थिति अनिवार्य करने पर जोर दिया गया है।
इस कदम के जरिए जामिया प्रशासन छात्रों तक पहुंचने वाली अकादमिक जानकारी के लिए एक आधिकारिक और निगरानी वाले माध्यम को बढ़ावा देना चाहता है, ताकि पढ़ाई से जुड़ी सूचनाएं सही तरीके से छात्रों तक पहुंच सकें और अनुचित सामग्री के प्रसार पर भी रोक लगाई जा सके.
