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भारत सरकार ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के लिए एनसीईआरटी का नया मॉड्यूल जारी किया

भारत सरकार ने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर एनसीईआरटी का नया मॉड्यूल जारी किया है। इस मॉड्यूल में भारत-पाकिस्तान विभाजन के इतिहास को समझाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। इसमें कांग्रेस, जिन्ना और लॉर्ड माउंटबेटन की भूमिका पर चर्चा की गई है। यह मॉड्यूल कक्षा 6 से 12 के छात्रों के लिए तैयार किया गया है और इसे पूरक शैक्षिक सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। राजनीतिक विवाद भी इस मुद्दे पर उभरे हैं, जिसमें कांग्रेस ने एनसीईआरटी के दृष्टिकोण को चुनौती दी है।
 
भारत सरकार ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के लिए एनसीईआरटी का नया मॉड्यूल जारी किया

विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की घोषणा


भारत सरकार ने 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मान्यता दी है। यह दिन भारत और पाकिस्तान के विभाजन का प्रतीक है, जिसने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। इस अवसर पर, एनसीईआरटी ने इस विषय को बेहतर तरीके से समझाने के लिए एक नया शैक्षिक मॉड्यूल पेश किया है।


एनसीईआरटी का नया मॉड्यूल क्या है?

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने 14 अगस्त के अवसर पर एक विशेष मॉड्यूल 'विभाजन के अपराधी' जारी किया है। इस मॉड्यूल में बताया गया है कि भारत का विभाजन किसी एक व्यक्ति के कारण नहीं हुआ, बल्कि इसके लिए तीन प्रमुख व्यक्ति या दल जिम्मेदार थे: मुहम्मद अली जिन्ना, जिन्होंने विभाजन की मांग की; कांग्रेस, जिसने इसे स्वीकार किया; और लॉर्ड माउंटबेटन, जिन्होंने इसे मंजूरी दी।


एनसीईआरटी के दो अलग मॉड्यूल

यह नया मॉड्यूल कक्षा 6 से 8 और कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए अलग-अलग तैयार किया गया है। यह पाठ्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि पूरक शैक्षिक सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें बच्चे पोस्टर, वाद-विवाद, प्रोजेक्ट और चर्चाओं के माध्यम से सीखेंगे।


विभाजन पर नेताओं की राय

मॉड्यूल में उल्लेख किया गया है कि स्वतंत्रता के समय कई प्रमुख नेताओं की विभाजन के बारे में अलग-अलग राय थी। सरदार वल्लभभाई पटेल विभाजन के खिलाफ थे, लेकिन अंततः उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। जुलाई 1947 में उन्होंने कहा था कि देश अब युद्ध का मैदान बन गया है।


जल्दबाजी के कारण समस्याएँ

एनसीईआरटी के अनुसार, लॉर्ड माउंटबेटन ने विभाजन की तिथि को जून 1948 से घटाकर अगस्त 1947 कर दिया, जिससे विभाजन को पूरा करने के लिए केवल 5 सप्ताह का समय मिला। इसके परिणामस्वरूप, पंजाब के लाखों लोगों को यह नहीं पता था कि वे भारत के नागरिक हैं या पाकिस्तान के।


राजनीतिक विवाद

इस मॉड्यूल को लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इसे गलत बताया है, और कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने एनसीईआरटी को चुनौती दी है कि वह विभाजन पर चर्चा करे।