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पूर्ण चंद्र ग्रहण 2026: ब्लड मून का अद्भुत नजारा

3 मार्च 2026 को भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। यह घटना शाम के समय चंद्रमा के उगने के साथ दिखाई देगी। जानें चंद्र ग्रहण की प्रक्रिया, इसके प्रकार और इसे देखने का सही समय। इस ग्रहण के दौरान चाँद लाल क्यों दिखाई देता है, यह भी जानें। यह एक सुरक्षित अनुभव है जिसे बिना किसी फिल्टर के देखा जा सकता है।
 
पूर्ण चंद्र ग्रहण 2026: ब्लड मून का अद्भुत नजारा

विशेष नजारा: पूर्ण चंद्र ग्रहण


नई दिल्ली: आज 3 मार्च 2026 को आसमान में एक अद्वितीय घटना होने जा रही है - पूर्ण चंद्र ग्रहण, जिसे ब्लड मून के नाम से भी जाना जाता है। भारत में यह ग्रहण शाम के समय चंद्रमा के उगने के साथ दिखाई देगा, हालांकि यह केवल इसके अंतिम चरण का दृश्य होगा। खगोल विज्ञान के शौकीन और आम लोग इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए उत्सुक हैं। यह घटना सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की विशेष स्थिति का परिणाम है।


चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन होता है और इस बार यह होली के आसपास आ रहा है। इस ग्रहण की खासियत यह है कि इसे बिना किसी फिल्टर के नंगी आंखों से देखना सुरक्षित है, जो सूर्य ग्रहण के मुकाबले एक अलग अनुभव है। आइए समझते हैं कि यह घटना वास्तव में क्या है और चाँद लाल क्यों दिखाई देता है।


चंद्र ग्रहण की प्रक्रिया

चाँद स्वयं प्रकाश नहीं देता, बल्कि सूर्य की रोशनी को परावर्तित करता है। जब पूर्णिमा के दिन पृथ्वी सूर्य और चाँद के बीच आ जाती है, तो पृथ्वी की छाया चाँद पर पड़ती है। यह छाया दो भागों में होती है - हल्की पेनुम्ब्रा और गहरी अम्ब्रा। जब चाँद पूरी तरह अम्ब्रा में चला जाता है, तब पूर्ण ग्रहण होता है। चाँद का व्यास लगभग 3476 किलोमीटर है और यह पृथ्वी का चक्कर 29.5 दिनों में लगाता है।


ग्रहण का दुर्लभ होना

चाँद की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा से लगभग 5 डिग्री झुकी हुई है। इसलिए अधिकांश पूर्णिमा पर चाँद पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से गुजरता है। साल में केवल दो से चार बार ही चाँद छाया के हिस्से से गुजरता है, जिससे ग्रहण होता है। यह झुकाव ग्रहण को दुर्लभ बनाता है।


चंद्र ग्रहण के प्रकार

चंद्र ग्रहण के तीन प्रकार होते हैं: पेनुम्ब्रल, आंशिक और पूर्ण। पेनुम्ब्रल ग्रहण में चाँद हल्की छाया से गुजरता है और मुश्किल से दिखाई देता है। आंशिक ग्रहण में चाँद का कुछ हिस्सा गहरी छाया में चला जाता है। पूर्ण ग्रहण सबसे खास होता है, जिसमें पूरा चाँद छाया में डूबकर लाल दिखाई देता है। इस बार भारत में अंतिम चरण में लालिमा स्पष्ट रूप से नजर आएगी।


ब्लड मून का रहस्य

पूर्ण ग्रहण के दौरान चाँद लाल या तांबे जैसा क्यों दिखता है? पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरती सूर्य की रोशनी में नीला रंग छंट जाता है और लाल रंग अधिक पहुंचता है। इसे रेले स्कैटरिंग कहा जाता है। NASA के विशेषज्ञों के अनुसार, यह रोशनी चाँद पर पड़कर उसे खूबसूरत लाल रंग देती है।


ग्रहण देखने का समय और सुरक्षा

इस ग्रहण की कुल अवधि कई घंटे है - यह दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे समाप्त होगा। भारत में चंद्रमा उगते समय (शाम करीब 6:20-6:30 बजे) अंतिम हिस्सा दिखाई देगा, खासकर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में। इसे नंगी आंखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित है, कोई फिल्टर की आवश्यकता नहीं है। दूरबीन से देखने पर और भी मजा आएगा।