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नीरज कुमार सिंह: बिहार से अमेरिका तक की प्रेरणादायक यात्रा

नीरज कुमार सिंह की यात्रा एक प्रेरणादायक कहानी है, जो बिहार के एक छोटे से गांव से शुरू होकर अमेरिका की University of Massachusetts Lowell तक पहुंची है। संघर्ष और मेहनत के साथ, नीरज ने पूरी तरह वित्तपोषित PhD छात्रवृत्ति प्राप्त की है। उनके पिता पान की दुकान चलाते थे और मां अक्सर बीमार रहती थीं, लेकिन नीरज ने शिक्षा के प्रति अपने जुनून को कभी कम नहीं होने दिया। जानें कैसे उन्होंने सामाजिक कार्य में योगदान दिया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने अनुभवों को साझा किया। उनका सपना प्रोफेसर बनना है, और उनकी कहानी यह दर्शाती है कि कठिनाइयों के बावजूद सफलता संभव है।
 

नीरज की संघर्ष और सफलता की कहानी


बिहार के सारण जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर अमेरिका तक पहुंचने वाले नीरज कुमार सिंह की कहानी संघर्ष, मेहनत और सफलता की मिसाल है। जिस परिवार के लिए कभी पढ़ाई की फीस जुटाना भी मुश्किल था, उसी परिवार का बेटा आज अमेरिका की यूनिवर्सिटी में पूरी तरह वित्तपोषित PhD कर रहा है।


शिक्षा में नीरज की उपलब्धियां

नीरज को अमेरिका की University of Massachusetts Lowell में Educational Leadership के क्षेत्र में PhD के लिए पूरी तरह वित्तपोषित छात्रवृत्ति मिली है। इस छात्रवृत्ति की कुल राशि लगभग 2.6 करोड़ रुपये है। वर्ष 2026-27 के इस PhD शोधार्थी वर्ग में 60 शोधकर्ता शामिल हैं और नीरज के अनुसार, भारत से चयनित होने वाले वह एकमात्र शोधार्थी हैं।


पारिवारिक पृष्ठभूमि

नीरज बिहार के सारण जिले के पानापुर प्रखंड के सतजोरा गांव के पकड़ी नरोट्टम टोला के निवासी हैं। उनके पिता प्रमोद सिंह पान की दुकान चलाते थे, जबकि मां गीता देवी अक्सर बीमार रहती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि मां के इलाज, घर के खर्च और बच्चों की पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था।


शिक्षा की शुरुआत

नीरज ने बताया कि दसवीं कक्षा के बाद उनकी पढ़ाई जारी रखने में आसपास के लोगों और शुभचिंतकों ने मदद की। इसी सहयोग की वजह से वह आगे की पढ़ाई जारी रख सके।


2017 में नया मोड़

नीरज ने वर्ष 2008 में दसवीं, 2010 में जगदम कॉलेज से इंटरमीडिएट और 2013 में जय प्रकाश विश्वविद्यालय से BSc की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वर्ष 2017 में उनका जुड़ाव नेहरू युवा केंद्र संगठन, सारण से हुआ।


सामाजिक कार्य में योगदान

नीरज ने शिक्षा, युवा विकास, स्वास्थ्य, आजीविका और सामुदायिक विकास से जुड़ी कई परियोजनाओं पर काम किया है। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने झारखंड और ओडिशा में USAID से जुड़ी परियोजना के तहत टीकाकरण कार्यक्रमों में योगदान दिया।


अंतरराष्ट्रीय अनुभव

अपने काम के दौरान नीरज को बांग्लादेश, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया, म्यांमार, कंबोडिया और लाओस जैसे देशों में युवा विकास और सामुदायिक कार्यक्रमों से जुड़ने का अवसर भी मिला।


शिक्षा में उत्कृष्टता

वर्ष 2023 में नीरज ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई से Diploma in Youth Leadership and Social Change किया। इसके साथ ही अलग-अलग विश्वविद्यालयों में 2,500 से अधिक विद्यार्थियों के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन में भी उन्होंने भूमिका निभाई।


अमेरिका में PhD की यात्रा

नीरज अब University of Massachusetts Lowell में Educational Leadership विषय पर PhD कर रहे हैं। उनके शोध की रुचि बहुभाषी शिक्षा, शिक्षा में समानता और समावेशी शिक्षा जैसे क्षेत्रों में है।


भविष्य की योजनाएं

नीरज का लक्ष्य भविष्य में शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में काम करना और प्रोफेसर बनना है। उनकी कहानी बताती है कि आर्थिक मुश्किलें रास्ते में बड़ी चुनौती जरूर बन सकती हैं, लेकिन लगातार शिक्षा, मेहनत और सही अवसर मिलने पर आगे बढ़ने के रास्ते भी खुल सकते हैं।