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महाराष्ट्र में NEET पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, डॉ. मनोज शिरुरे बने मुख्य गवाह

महाराष्ट्र में NEET परीक्षा के पेपर लीक मामले में डॉ. मनोज शिरुरे ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने लीक हुए पेपर को चार अस्पतालों में बांटा था और अब CBI उन्हें मुख्य सरकारी गवाह बनाने पर विचार कर रही है। जांच में छात्रों और उनके माता-पिता पर भी ध्यान दिया जा रहा है। जानें इस मामले में क्या नया खुलासा हुआ है और डॉ. मनोज का क्या कहना है।
 
महाराष्ट्र में NEET पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, डॉ. मनोज शिरुरे बने मुख्य गवाह

NEET पेपर लीक का मामला


महाराष्ट्र में NEET परीक्षा के पेपर लीक से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। लातूर के बाल रोग विशेषज्ञ, डॉ. मनोज शिरुरे ने लीक हुए पेपर को चार अस्पतालों में वितरित किया था। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अब उन्हें इस मामले में मुख्य सरकारी गवाह बनाने पर विचार कर रहा है। डॉ. मनोज के बयान और सबूतों के आधार पर, लातूर, नांदेड़ और संभाजीनगर के पांच अन्य चिकित्सकों से पूछताछ की जा रही है। इनमें से दो बाल रोग विशेषज्ञ, दो स्त्री रोग विशेषज्ञ और एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत हैं।


छात्रों और अभिभावकों पर जांच का दायरा

NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में अब छात्रों और उनके माता-पिता पर भी जांच का दायरा बढ़ाया गया है। इसी संदर्भ में, CBI ने लातूर के प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज शिरुरे को हिरासत में लिया है और पुणे में उनसे पूछताछ की जा रही है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे और परिवार के अन्य बच्चों को लाभ पहुंचाने के लिए लीक हुए पेपर खरीदे।


डॉ. मनोज का सरकारी गवाह बनने का निर्णय

**मनोज सरकारी गवाह बनने को तैयार**
सूत्रों के अनुसार, CBI ने लातूर में उनके अस्पताल और अन्य स्थानों पर छापे मारे, जहां कई घंटों तक पूछताछ की गई। इस दौरान, मोबाइल फोन, दस्तावेज़ और अन्य डिजिटल सबूत जब्त किए गए। बाद में, उन्हें पुणे में CBI कार्यालय लाया गया, जहां देर रात तक पूछताछ जारी रही। सूत्रों के मुताबिक, डॉ. मनोज ने इस मामले में सरकारी गवाह बनने के लिए सहमति दी है।


पेपर की कीमत और नेटवर्क की जांच

**पेपर ₹12 लाख में खरीदा गया**
जांच एजेंसियों को संदेह है कि डॉ. मनोज ने अपने बेटे के लिए लीक हुआ पेपर लगभग ₹12 लाख में खरीदा था। इसके बाद, खर्च की भरपाई के लिए, उसी पेपर की PDF प्रतियां टेलीग्राम के माध्यम से अन्य लोगों को भेजी गईं। CBI अब इस नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन की भी जांच कर रही है।


डिजिटल डेटा की बरामदगी

जांच के दौरान, CBI की तकनीकी टीम ने बड़ी मात्रा में डिलीट किया गया डिजिटल डेटा बरामद किया। आरोप है कि 3 मई को, शिवराज मोटेगांवकर ने अपने मोबाइल फोन से कई फाइलें डिलीट की थीं; हालाँकि, फोरेंसिक टीम ने बाद में उस डेटा को पुनः प्राप्त कर लिया।


प्रश्न पत्र की तैयारी की प्रक्रिया

**कुछ प्रश्न लिखकर याद किए गए थे**
जांच में यह भी सामने आया कि प्रश्न पत्र तैयार करते समय, कुछ प्रश्न हाथ से लिखे गए थे और उन्हें याद किया गया था; इसके बाद, उन्हें PDF फॉर्मेट में परिवर्तित किया गया और मोबाइल फोन तथा टेलीग्राम के माध्यम से साझा किया गया। CBI के अनुसार, पेपर लीक का यह नेटवर्क पाँच राज्यों में फैला हुआ है, जिसमें महाराष्ट्र और राजस्थान मुख्य वितरण केंद्र के रूप में उभरे हैं। नागपुर मॉड्यूल और शिवराज मोटेगांवकर नेटवर्क की जांच अभी भी जारी है।