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यूपी बोर्ड ने जन्मतिथि के रिकॉर्ड में सख्ती की, नए नियम लागू

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हाईस्कूल प्रमाणपत्र में जन्मतिथि के रिकॉर्ड को लेकर नए नियम लागू किए हैं। अब स्कूलों को छात्रों की जन्मतिथि दर्ज करते समय पहले दाखिले के समय प्रस्तुत किए गए वैध आयु प्रमाण को आधार बनाना होगा। इस कदम का उद्देश्य जन्मतिथि में बदलाव की कोशिशों को रोकना है। जानें इस प्रक्रिया के बारे में विस्तार से और क्या हैं नए दिशा-निर्देश।
 

यूपी बोर्ड के नए नियम



उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने हाईस्कूल प्रमाणपत्र और मार्कशीट में जन्मतिथि के रिकॉर्ड को लेकर नए नियम लागू किए हैं। अब स्कूलों को छात्रों की जन्मतिथि दर्ज करते समय पहले दाखिले के समय प्रस्तुत किए गए वैध आयु प्रमाण को आधार बनाना होगा। इसके बाद जन्मतिथि में बदलाव के लिए दिए जाने वाले दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी।


जन्मतिथि के लिए नए दिशा-निर्देश

यह निर्णय उन मामलों के बाद लिया गया है, जहां विभिन्न दस्तावेजों के आधार पर जन्मतिथि में बदलाव की कोशिश की गई थी। स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों के मूल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखें और दस्तावेजों की सत्यता की जांच करें।


पहली बार दाखिले के समय जन्मतिथि तय होगी

यूपी बोर्ड के नए निर्देशों के अनुसार, छात्र के स्कूल में पहली बार प्रवेश के समय जिस वैध दस्तावेज के आधार पर जन्मतिथि दर्ज की जाएगी, वही रिकॉर्ड आगे के दस्तावेजों में उपयोग किया जाएगा।


स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जन्मतिथि के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेज की प्रति और उससे संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।


जन्मतिथि में बदलाव की प्रक्रिया

बोर्ड के सामने जन्मतिथि संशोधन से जुड़े कई मामले आए थे। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ मामलों में बाद में जारी किए गए ट्रांसफर सर्टिफिकेट को जन्मतिथि का प्रमाण बनाकर रिकॉर्ड में बदलाव करने की कोशिश की गई।


कुछ मामलों में छात्र के प्रारंभिक प्रवेश के समय की उम्र और बाद में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों में अंतर भी पाया गया।


जन्मतिथि के लिए मान्य दस्तावेज

परिषद के निर्देशों के अनुसार, छात्र की उम्र और जन्मतिथि तय करने के लिए वैध दस्तावेजों को प्राथमिकता दी जाएगी। यदि प्रवेश के समय जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं है, तो अस्पताल का रिकॉर्ड, पंजीकृत सहायक नर्स एवं दाई का रिकॉर्ड, आंगनबाड़ी रिकॉर्ड या ग्राम पंचायत द्वारा जारी जन्म प्रमाणपत्र का उपयोग किया जा सकता है।


मार्कशीट में गलत जन्मतिथि के लिए प्रक्रिया

यदि हाईस्कूल की मार्कशीट या प्रमाणपत्र में जन्मतिथि गलत है, तो छात्र को बोर्ड द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संशोधन के लिए आवेदन करना होगा।


आवेदक को संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन करते समय जन्मतिथि से जुड़े मूल और वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।


पुराने रिकॉर्ड की जांच

नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जन्मतिथि में बदलाव के लिए केवल वर्तमान दस्तावेज को आधार नहीं बनाया जाएगा। बोर्ड और संबंधित अधिकारी छात्र के पुराने शैक्षणिक रिकॉर्ड की भी जांच कर सकते हैं।


छात्रों और अभिभावकों के लिए सलाह

छात्र और अभिभावक एडमिशन के समय जन्म प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी को ध्यान से जांचें। एक बार स्कूल रिकॉर्ड में जन्मतिथि दर्ज होने के बाद उसमें बदलाव की प्रक्रिया लंबी और दस्तावेज आधारित हो सकती है।


यूपी बोर्ड की यह सख्ती रिकॉर्ड में गड़बड़ियों को रोकने और छात्रों के जन्मतिथि से जुड़े दस्तावेजों में एकरूपता बनाए रखने के लिए है।