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सरकारी परीक्षा प्रणाली में बदलाव की तैयारी: JEE, NEET और CUET को 11वीं में आयोजित करने का प्रस्ताव

केंद्र सरकार ने JEE, NEET और CUET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक नई दिशा में कदम बढ़ाने का निर्णय लिया है। 11-सदस्यीय समिति ने सुझाव दिया है कि इन परीक्षाओं को 11वीं कक्षा में आयोजित किया जाए, जिससे छात्रों पर पड़ने वाले मानसिक दबाव को कम किया जा सके। इसके अलावा, साल में दो बार परीक्षा आयोजित करने का भी प्रस्ताव है। ये बदलाव शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन ला सकते हैं।
 
सरकारी परीक्षा प्रणाली में बदलाव की तैयारी: JEE, NEET और CUET को 11वीं में आयोजित करने का प्रस्ताव

सरकारी परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कदम



केंद्र सरकार ने JEE, NEET और CUET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते कोचिंग कल्चर के खिलाफ सख्त कदम उठाने की योजना बनाई है। छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव, स्कूल शिक्षा की घटती भूमिका और डमी स्कूलों के बढ़ते चलन के मद्देनजर, सरकार ने एक 11-सदस्यीय केंद्रीय समिति का गठन किया है। हाल ही में हुई बैठक में इस समिति ने कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले सुझावों पर विचार किया। इन सुझावों के कार्यान्वयन से न केवल प्रवेश परीक्षाओं का प्रारूप बदलेगा, बल्कि छात्रों के लिए संपूर्ण शैक्षणिक पैटर्न भी बदल सकता है।


11वीं कक्षा में JEE, NEET और CUET की परीक्षा

11-सदस्यीय समिति ने 15 नवंबर को अपनी बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। समिति ने स्वीकार किया कि आजकल अधिकांश छात्र स्कूल के बाद पांच से छह घंटे कोचिंग में बिताते हैं, जो उनके स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। समिति के सामने सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह था कि राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाएं जैसे JEE, NEET और CUET को 12वीं के बजाय 11वीं कक्षा में आयोजित किया जाए।


साल में दो बार प्रवेश परीक्षाओं का सुझाव

समिति ने यह भी सुझाव दिया कि प्रवेश परीक्षाएं साल में दो बार, यानी अप्रैल और नवंबर में आयोजित की जाएं। इससे छात्रों को एक ही वर्ष में दो अवसर मिलेंगे और एक ही परीक्षा में सब कुछ संभालने का तनाव कम होगा। यह सुझाव नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है। इसके अलावा, भविष्य में प्रवेश केवल एक ही परीक्षा के आधार पर नहीं होना चाहिए, बल्कि एक हाइब्रिड प्रणाली अपनाई जानी चाहिए, जिसमें बोर्ड परीक्षा के अंक और योग्यता परीक्षण दोनों को महत्व दिया जाए।


डमी स्कूलों और कमजोर शिक्षा प्रणाली पर चिंता

बैठक में डमी स्कूलों, शिक्षकों की गुणवत्ता में असमानता, कमजोर मूल्यांकन प्रणाली और करियर काउंसलिंग की कमी पर भी चिंता व्यक्त की गई। समिति का मानना है कि कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता को कम करना तब तक मुश्किल होगा जब तक स्कूल शिक्षा को मजबूत नहीं किया जाता। वर्तमान में, ये सभी सुझाव चर्चा के चरण में हैं। पाठ्यक्रम की समीक्षा और गहन अध्ययन के बाद, समिति अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को प्रस्तुत करेगी। यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं, तो पूरे प्रवेश प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।