संजय निषाद का यूजीसी नियमों पर बयान: कानून की प्रक्रिया का किया बचाव
लखनऊ में संजय निषाद का बयान
लखनऊ: यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इस संदर्भ में योगी सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानून को लागू करने के लिए एक विस्तृत और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया जाता है, जिसे नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
आरक्षण पर संजय निषाद का तर्क
संजय निषाद ने इस कानून का समर्थन करते हुए कहा कि जब जनरल कैटेगरी के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की गई थी, तब कोई विरोध नहीं हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि उस समय भी सभी निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिए गए थे, और आज भी वही प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
कानून निर्माण की प्रक्रिया
संजय निषाद ने क्या दिया तर्क?
निषाद पार्टी के अध्यक्ष ने बताया कि किसी भी कानून के निर्माण से पहले संबंधित आयोगों का गठन किया जाता है। ये आयोग विभिन्न पहलुओं पर गहन अध्ययन करते हैं, विस्तृत रिपोर्ट तैयार करते हैं और विशेषज्ञों की राय लेते हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और संविधान के प्रावधानों के अनुसार अंतिम निर्णय लिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और नियमों के अनुसार होती है।
UGC के नए नियमों पर चल रहे विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय निषाद ने EWS के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब जनरल कैटेगरी के लिए आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण देने का निर्णय लिया गया था, तब देश में कोई विरोध नहीं हुआ।
सरकार की मंशा
UGC नए नियम के पीछे क्या है सरकार की मंशा?
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी भी वर्ग के साथ अन्याय करना नहीं है। उनका कहना था कि सरकार का लक्ष्य सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी निर्णय का मुख्य उद्देश्य समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखना होता है।
संजय निषाद ने विरोध कर रहे लोगों से अपील की कि किसी भी मुद्दे पर आंदोलन करने से पहले तथ्यों और पूरी प्रक्रिया को समझना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति जताना सभी का अधिकार है, लेकिन यह असहमति संवाद और संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे में रहकर व्यक्त की जानी चाहिए।
