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भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र नामांकन और वित्तीय प्रवृत्तियाँ

भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र नामांकन में वृद्धि हो रही है, जबकि आईआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए वित्त पोषण में सुधार हो रहा है। शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि SC, ST और OBC श्रेणियों के छात्रों की भागीदारी में भी वृद्धि हुई है। इसके अलावा, सरकार ने नए संस्थानों की स्थापना और छात्रवृत्तियों के माध्यम से सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा में शामिल करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इस लेख में जानें कि कैसे ये बदलाव भारतीय शिक्षा प्रणाली को प्रभावित कर रहे हैं।
 

उच्च शिक्षा में छात्र नामांकन की स्थिति



शिक्षा मंत्रालय के लोकसभा में दिए गए उत्तर के अनुसार, आईआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए वित्त पोषण में वृद्धि हुई है, जबकि आईआईएम और आईआईएसईआर के लिए बजटीय आवंटन में कमी आई है। उच्च शिक्षा से संबंधित संपूर्ण आंकड़े इस प्रकार हैं।


केंद्र सरकार छात्रों की पहुंच को बेहतर बनाने और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों की भागीदारी को बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है। मंत्रालय ने बताया कि आईआईटी, आईआईएम, आईआईएसईआर और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्र नामांकन बढ़ा है। हालांकि, विभिन्न संस्थानों के लिए वित्तीय आंकड़े अलग तस्वीर पेश करते हैं।


केंद्रीय विश्वविद्यालयों में छात्रों की संख्या

शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने लोकसभा में लिखित उत्तर में बताया कि AISHE 2023-24 के अनुसार, केंद्रीय विश्वविद्यालयों में लगभग 7.95 लाख छात्र नामांकित हैं। इसमें लगभग 4.11 लाख पुरुष और 3.84 लाख महिला छात्र शामिल हैं। वर्तमान में, आईआईटी में लगभग 1.49 लाख, आईआईएम में लगभग 23,000 और आईआईएसईआर में लगभग 11,600 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।


छात्र श्रेणियों में वृद्धि

मंत्रालय के अनुसार, पिछले दशक में SC, ST और OBC श्रेणियों के छात्रों की भागीदारी में भी वृद्धि हुई है। SC छात्रों का हिस्सा 2014-15 में 11% से बढ़कर 2023-24 में 13% हो गया है। ST छात्रों का हिस्सा 4% से बढ़कर 5% और OBC छात्रों का हिस्सा 14% से बढ़कर 20% हो गया है। सरकार ने बताया कि NEP 2020 का उद्देश्य सभी वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा में समान अवसर प्रदान करना है। इस लक्ष्य के अनुरूप, 2014 से 16 नए IIIT, 8 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 8 IIM, 7 IIT, 2 IISER, 1 NIT और 12 AIIMS स्थापित किए गए हैं।


आईआईटी के लिए बढ़ा हुआ वित्त पोषण

सरकार ने 2025-26 के बजट में पांच नए आईआईटी में अनुसंधान पार्कों और शैक्षणिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए ₹11,828.79 करोड़ की मंजूरी दी है। इस पहल से लगभग 6,500 अतिरिक्त छात्रों के लिए सीटें बनाई जाएंगी। वहीं, 2026-27 के बजट में पांच विश्वविद्यालय टाउनशिप के विकास और हर जिले में एक लड़कियों के छात्रावास के निर्माण की घोषणा की गई है, ताकि STEM शिक्षा में लड़कियों को समर्थन मिल सके।


वित्तीय प्रवृत्तियाँ

वित्तीय आंकड़ों पर एक नज़र डालने पर पता चलता है कि आईआईटी के लिए आवंटन में लगातार वृद्धि हो रही है, जो 2025-26 में ₹11,381.21 करोड़ तक पहुंच गई है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए आवंटन भी बढ़कर लगभग ₹16,730 करोड़ हो गया है। इसके विपरीत, आईआईएम के लिए वित्त पोषण 2024-25 में ₹319.40 करोड़ से घटकर 2025-26 में ₹278.65 करोड़ हो गया है, जो लगभग ₹40.75 करोड़ की कमी है। आईआईएसईआर के लिए आवंटन भी ₹1,459.30 करोड़ से घटकर ₹1,328.54 करोड़ हो गया है, जो लगभग ₹130.76 करोड़ की कमी दर्शाता है। जबकि आईआईएम और आईआईएसईआर के लिए बजटीय आवंटन में कमी का उल्लेख लोकसभा में किया गया, लेकिन कमी के लिए कोई विशेष कारण नहीं बताया गया।


मंत्रालय ने बताया कि केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में SC, ST और OBC श्रेणियों के लिए क्रमशः 15%, 7.5% और 27% आरक्षण कोटा लागू किया गया है। इसके अतिरिक्त, आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों को उच्च शिक्षा में शामिल करने के लिए छात्रवृत्तियों, शुल्क छूट और अन्य सहायता योजनाओं के माध्यम से प्रयास किए जा रहे हैं।