NEET-UG परीक्षा 2026: नई योजना और सुरक्षा उपाय
NEET-UG परीक्षा का आयोजन
NEET-UG परीक्षा 2026: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) जून में NEET-UG परीक्षा का आयोजन करेगी। उम्मीदवारों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय देने के लिए परीक्षा की अनुसूची 20 मई तक जारी की जाएगी। परीक्षा का आयोजन पेपर-ऑफ-प्रकार में ही होगा।
CUET-UG और NEET-UG की तिथियाँ
सूत्रों के अनुसार, CUET-UG परीक्षा 31 मई को निर्धारित है, और NTA NEET-UG परीक्षा का आयोजन उसके बाद करेगा। यह परीक्षा जून के पहले या दूसरे सप्ताह में होने की संभावना है। सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रश्न पत्र अब पूर्व टीम द्वारा नहीं बनाया जाएगा, और पिछले परीक्षाओं से कोई प्रश्न दोहराए नहीं जाएंगे। नई टीम में ऐसे सदस्य शामिल होंगे जो पहले NTA से जुड़े नहीं रहे हैं। इस टीम के सदस्यों की जानकारी केवल कुछ NTA अधिकारियों के लिए उपलब्ध होगी। प्रश्नों के चयन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करने की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।
गृह मंत्रालय की निगरानी में प्रश्न पत्रों का प्रिंटिंग
**गृह मंत्रालय की निगरानी में प्रश्न पत्रों का प्रिंटिंग**
इस बार नए प्रश्न पत्रों का प्रिंटिंग गृह मंत्रालय की सीधी निगरानी में किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, "ऑन-द-स्पॉट प्रिंटिंग" के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से गोपनीय रहेगी, और इसके संबंध में अंतिम निर्णय योजना के समापन चरणों के दौरान लिया जाएगा।
छात्रों की मेहनत पर कोई समझौता नहीं
**छात्रों की मेहनत पर कोई समझौता नहीं**
NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने आश्वासन दिया है कि इस बार छात्रों की मेहनत पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि "पेपर लीक माफिया" ने लाखों छात्रों को नुकसान पहुँचाया है जो ईमानदारी से पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय किए जाएंगे। सिंह ने कहा कि यदि किसी छात्र या अभिभावक के पास पेपर लीक या नमूना प्रश्न पत्रों की उपलब्धता से संबंधित जानकारी है, तो वे इसे ईमेल के माध्यम से साझा कर सकते हैं। उनकी पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी।
राज्यों को स्वायत्तता की मांग
**विजय और सिद्धारमैया की मांग: राज्यों को स्वायत्तता दी जाए**
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्रीय सरकार से NEET परीक्षा को समाप्त करने की मांग की है। उनका तर्क है कि प्रत्येक राज्य को अपनी कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों के आधार पर प्रवेश कराने की स्वायत्तता दी जानी चाहिए।
