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CBSE ने 2026 बोर्ड परीक्षा के लिए अपार आईडी को अनिवार्य किया

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए अपार आईडी को अनिवार्य कर दिया है। इस निर्णय का उद्देश्य छात्रों की पहचान की पारदर्शिता को बढ़ाना और परीक्षा से संबंधित अनियमितताओं को रोकना है। सभी स्कूलों को 29 अगस्त से 30 सितंबर 2025 के बीच उम्मीदवारों की सूची प्रस्तुत करनी होगी। जानें इस प्रक्रिया के बारे में और आवश्यक जानकारी के लिए पढ़ें पूरा लेख।
 
CBSE ने 2026 बोर्ड परीक्षा के लिए अपार आईडी को अनिवार्य किया

अपार आईडी की अनिवार्यता



केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2025-26 में होने वाली 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए अपार आईडी को अनिवार्य कर दिया है। अब जिन छात्रों के पास अपार आईडी नहीं होगी, वे परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे।


यह निर्देश CBSE द्वारा स्कूलों को भेजे गए दिशा-निर्देशों में शामिल है, जिसके अनुसार उम्मीदवारों की सूची (LOC) प्रस्तुत करना अनिवार्य है। हर साल, स्कूलों को बोर्ड परीक्षा आयोजित करने से पहले अपने छात्रों का डेटा CBSE को भेजना होता है। इसी आधार पर प्रवेश पत्र बनाए जाते हैं और परीक्षा की प्रक्रिया तय की जाती है।


LOC प्रस्तुत करने की प्रक्रिया

बोर्ड ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 29 अगस्त से 30 सितंबर 2025 के बीच ऑनलाइन मोड के माध्यम से LOC प्रस्तुत करें। जो स्कूल 3 से 11 अक्टूबर 2025 के बीच देर से प्रस्तुत करेंगे, उन्हें लेट फीस के साथ यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि LOC और शुल्क प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि समान होगी, अर्थात् दोनों को समय पर प्रस्तुत करना आवश्यक है।


केवल वही छात्र जिनका नाम LOC में शामिल होगा, वे 2026 की बोर्ड परीक्षा में बैठ सकेंगे। इसलिए, स्कूलों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि वे छात्रों का नाम, जन्म तिथि, लिंग, श्रेणी और माता-पिता का नाम सही-सही बोर्ड को भेजें।


अपार आईडी की अनिवार्यता का कारण

CBSE ने इस बार LOC को अपार आईडी से जोड़ने का निर्णय लिया है। अपार आईडी एक 12 अंकों की डिजिटल पहचान है, जिसे भारत सरकार द्वारा पेश किया गया है, जिसमें छात्रों का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटल रूप में दर्ज होता है।


इसमें मार्कशीट, डिग्रियां, प्रमाणपत्र, छात्रवृत्तियां, पुरस्कार और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियां सुरक्षित रहती हैं। इसका मतलब है कि जहां भी छात्र अपार आईडी के साथ अध्ययन करते हैं, उनका शैक्षणिक इतिहास उसी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा।


CBSE का मानना है कि यह कदम न केवल पहचान की पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा, बल्कि भविष्य में परीक्षा और परिणामों से संबंधित अनियमितताओं को भी रोकने में मदद करेगा।


आवश्यक जानकारी

छात्र का पूरा नाम


अभिभावक या संरक्षक का नाम


जन्म तिथि


अपार आईडी


सही विषय कोड और संयोजन


आवेदन श्रेणी (नवीनता/सुधार/कंपार्टमेंट)