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भाई के साथ रहने के लिए महरूफ ने चुनी IIT कानपुर, बनाया नया रिकॉर्ड

भुवनेश्वर के महरूफ अहमद खान ने जेईई एडवांस्ड में 32वीं रैंक हासिल करने के बावजूद IIT बॉम्बे में दाखिला नहीं लिया। उन्होंने अपने जुड़वा भाई के साथ रहने के लिए IIT कानपुर को चुना, जो भाईचारे की एक अनोखी मिसाल है। इस निर्णय ने IIT कानपुर के लिए एक नया अध्याय जोड़ा है, क्योंकि यह सात वर्षों में पहली बार है कि किसी टॉप-100 रैंक वाले छात्र ने यहां दाखिला लिया। जानें इस प्रेरणादायक कहानी के बारे में।
 

भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए महरूफ का निर्णय


जेईई एडवांस्ड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले महरूफ अहमद खान ने एक ऐसा निर्णय लिया है, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में दाखिला लेने के बजाय अपने जुड़वा भाई के साथ रहने का विकल्प चुनते हुए आईआईटी कानपुर को प्राथमिकता दी।


भाई के साथ पढ़ाई का निर्णय

भुवनेश्वर के निवासी महरूफ ने जेईई एडवांस्ड 2026 में ऑल इंडिया 32वीं रैंक प्राप्त की। इस रैंक के बाद उन्हें देश के प्रमुख संस्थानों में दाखिले का अवसर मिला। फिर भी, उन्होंने आईआईटी बॉम्बे की बजाय आईआईटी कानपुर को चुना, क्योंकि उनके जुड़वा भाई मसरूर ने 169वीं रैंक हासिल की। दोनों भाई अब आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में एक साथ पढ़ाई करेंगे।


आईआईटी कानपुर के लिए नया अध्याय

महरूफ का यह निर्णय आईआईटी कानपुर के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह संस्थान के लिए सात वर्षों में पहली बार है कि किसी टॉप-100 रैंक वाले छात्र ने यहां दाखिला लिया है। इससे पहले, 2019 में 95वीं रैंक वाले छात्र ने यहां प्रवेश लिया था। संस्थान लंबे समय से ऐसे प्रतिभाशाली छात्रों को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा था।


स्कॉलरशिप योजना का असफल प्रयास

आईआईटी कानपुर ने 2022 में 'ब्राइट माइंड्स स्कॉलरशिप' योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य टॉप रैंक वाले छात्रों को संस्थान से जोड़ना था। इस योजना के तहत हर साल तीन लाख रुपये तक की सहायता दी जाती थी। हालांकि, पिछले चार वर्षों में इस योजना के तहत कोई भी छात्र संस्थान तक नहीं पहुंचा, जिसके कारण इसे बंद कर दिया गया।


संस्थान का गर्व

जोसा की पांचवें चरण की काउंसिलिंग के बाद, महरूफ और उनके भाई ने आईआईटी कानपुर में दाखिले की प्रक्रिया पूरी कर ली। संस्थान के डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स, प्रोफेसर प्रतीक सेन ने कहा कि टॉप-32 रैंक वाले छात्र का आईआईटी कानपुर चुनना पूरे संस्थान के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि दोनों भाइयों का दाखिला सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। महरूफ का यह निर्णय केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि परिवार और रिश्तों को प्राथमिकता देने का प्रेरणादायक उदाहरण भी है।