B.Pharm पाठ्यक्रम में नई तकनीकों का समावेश: PCI द्वारा महत्वपूर्ण बदलाव
B.Pharm पाठ्यक्रम में बदलाव
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने 12 वर्षों के बाद B.Pharm पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। नए पाठ्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल स्वास्थ्य, उद्यमिता, संचार कौशल और रोगी-केंद्रित देखभाल जैसे विषयों को प्राथमिकता दी गई है। इसके अतिरिक्त, यदि कोई छात्र एक सेमेस्टर में असफल होता है, तो उसे पूरा सेमेस्टर दोहराने की आवश्यकता नहीं होगी; वह अगले सेमेस्टर में अपनी पढ़ाई जारी रख सकता है, लेकिन असफल सेमेस्टर की परीक्षा फिर से देनी होगी।
डिजिटल शिक्षा का समावेश
PCI के अध्यक्ष मोंटू भाई पटेल ने एक विशेष बातचीत में बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों और उद्योग की आवश्यकताओं को देखते हुए, केवल पाठ्यपुस्तक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। फार्मासिस्टों को वैज्ञानिक सोच, नैदानिक समझ और तकनीकी नवाचार की क्षमता से लैस होना आवश्यक है। B.Pharm 2026 पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है।
**पहले सेमेस्टर से डिजिटल शिक्षा का समावेश**
नए पाठ्यक्रम में पहले सेमेस्टर से डिजिटल शिक्षा को शामिल किया गया है। B.Pharm के छात्रों को पहले सेमेस्टर में "फार्मास्यूटिकल साइंसेज के लिए पायथन प्रोग्रामिंग के मूलभूत सिद्धांत" पढ़ाया जाएगा। दूसरे सेमेस्टर में अनुप्रयुक्त बायोस्टैटिस्टिक्स और डेटा एनालिटिक्स, जबकि तीसरे सेमेस्टर में फार्मास्यूटिकल साइंसेज में मशीन लर्निंग का परिचय दिया जाएगा।
छात्रों के लिए अधिक विकल्प
**छात्रों के लिए अधिक विकल्प**
नए पाठ्यक्रम में छात्रों को अपनी पसंद के अनुसार विषय चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। छात्र अब कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम (SEC), क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम (AEC), और मूल्य-वर्धित पाठ्यक्रम (VAC) के माध्यम से अपने रुचियों के अनुसार विषय चुन सकते हैं। इनमें ग्रीन कैमिस्ट्री, चिकित्सा उपकरण, वैज्ञानिक लेखन, दवा स्टोर प्रबंधन, कंप्यूटर-आधारित दवा डिजाइन, पेशेवर कौशल, सफाई मान्यता, और अशुद्धता प्रोफाइलिंग जैसे विषय शामिल हैं।
इंटर्नशिप और अनुसंधान परियोजनाएं
इसके अलावा, नए पाठ्यक्रम के तहत छात्रों को दो चरणों में इंटर्नशिप करनी होगी। इंटर्नशिप के लिए न्यूनतम 240 घंटे का प्रशिक्षण अनिवार्य किया गया है। प्रशिक्षण फार्मास्यूटिकल्स, कॉस्मेटिक्स, चिकित्सा उपकरण, खाद्य उद्योग, अस्पतालों, और सामुदायिक फार्मेसियों जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, सातवें और आठवें सेमेस्टर में अनुसंधान परियोजनाएं अनिवार्य होंगी, जो छात्रों को अनुसंधान और नवाचार से जोड़ेंगी.
अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
**अन्य महत्वपूर्ण बदलावों में शामिल हैं:**
1. नए विकल्प-आधारित क्रेडिट प्रणाली (CBCS) के तहत, छात्रों को B.Pharm डिग्री प्राप्त करने के लिए न्यूनतम 193 क्रेडिट अर्जित करने होंगे। क्रेडिट थ्योरी, प्रैक्टिकल, इंटर्नशिप और परियोजनाओं के लिए दिए जाएंगे।
2. पाठ्यक्रम के भीतर मूल्यांकन प्रणाली को भी संशोधित किया गया है। अंतिम परिणाम अब केवल अंतिम परीक्षा पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि पूरे सेमेस्टर में किए गए असाइनमेंट, क्विज़, समूह चर्चा, फील्डवर्क, और सत्रीय परीक्षणों पर भी निर्भर करेगा।
3. छात्रों के लिए 75 प्रतिशत की न्यूनतम उपस्थिति अनिवार्य है। उपस्थिति के आधार पर अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे, जबकि 75 प्रतिशत से कम उपस्थिति पर कोई अंक नहीं दिए जाएंगे।
4. प्रत्येक फार्मेसी संस्थान को छात्रों के लिए वार्षिक रूप से कम से कम एक औद्योगिक या क्षेत्रीय यात्रा आयोजित करनी होगी। इसके अतिरिक्त, संस्थानों को एक गांव या वार्ड को अपनाना होगा और सामुदायिक सेवा, दवा उपयोग पर जागरूकता अभियान, और रोगी परामर्श जैसी गतिविधियों का संचालन करना होगा।
5. नए पाठ्यक्रम में "नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र" पर एक विषय शामिल करके, छात्रों को नवाचार और उद्यमिता की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, न कि केवल नौकरी के लिए।
