छत्तीसगढ़ में सरकारी कॉलेजों के लिए 700 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू
छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया
छत्तीसगढ़ में सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों और शैक्षणिक स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने एक नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की है। इस संबंध में, विभाग ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) को एक प्रस्ताव भेजा है, और जल्द ही एक आधिकारिक अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। इस भर्ती अभियान के तहत सहायक प्रोफेसर, पुस्तकालयाध्यक्ष और खेल अधिकारी जैसे पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।
कुल 700 पदों की भर्ती
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 700 रिक्तियों को भरा जाएगा। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद, यह उम्मीद की जा रही है कि सरकारी कॉलेजों में शिक्षण और शैक्षणिक सुविधाओं की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार होगा।
भर्ती के लिए भरे जाने वाले पद
पदों की संख्या:
सहायक प्रोफेसर: 625 पद
पुस्तकालयाध्यक्ष: 50 पद
खेल अधिकारी: 25 पद
इन सभी श्रेणियों को मिलाकर कुल 700 रिक्तियों को भरा जाएगा।
विभिन्न विषयों के लिए सहायक प्रोफेसरों की आवश्यकता
सरकारी कॉलेजों में विभिन्न विषयों के लिए सहायक प्रोफेसरों की भर्ती की जाएगी। इसमें हिंदी, अंग्रेजी और राजनीतिक विज्ञान के लिए 50-50 रिक्तियां शामिल हैं। इसके अलावा, समाजशास्त्र, भौतिकी, गणित, रसायन विज्ञान, वनस्पति और जूलॉजी में भी 50-50 रिक्तियां भरी जाएंगी।
अन्य विषयों के लिए, इतिहास, भूगोल और अर्थशास्त्र के लिए 25-25 रिक्तियां निर्धारित की गई हैं। इसके अलावा, वाणिज्य में 75, कंप्यूटर अनुप्रयोगों में 15 और कानून में 10 रिक्तियों की नियुक्तियां की जाएंगी।
आयोग को भेजी गई जानकारी
उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, सभी पदों के लिए आरक्षण रोस्टर और विषयवार रिक्तियों की सूची को अंतिम रूप दिया गया है। विभाग ने 24 फरवरी 2026 को सभी संबंधित विवरण छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को भेज दिए हैं, जिससे प्रक्रिया के अगले चरण की शुरुआत हो सके।
आधिकारिक अधिसूचना कब जारी होगी?
विभाग ने आयोग को शैक्षणिक योग्यताओं, भर्ती नियमों, श्रेणीवार रिक्तियों के वितरण और परीक्षा पाठ्यक्रम के बारे में भी जानकारी भेजी है। अब आयोग से जल्द ही आधिकारिक भर्ती अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है। अधिसूचना जारी होने के बाद, योग्य उम्मीदवार अपनी आवेदन पत्र जमा कर सकेंगे। इस भर्ती प्रक्रिया के पूरा होने से राज्य के सरकारी कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर होगी, जिससे छात्रों को बेहतर शिक्षा का लाभ मिलेगा।