कैसे करें अध्ययन परमिट की समाप्ति पर कार्रवाई: एक मार्गदर्शिका
कनाडा में अध्ययन: एक आकर्षक विकल्प
कनाडा में अध्ययन: कनाडा भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा का एक लोकप्रिय गंतव्य है। इस बात का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में 400,000 से अधिक भारतीय छात्र वहां डिग्री प्राप्त कर रहे हैं। कनाडा में अध्ययन करने के लिए एक अध्ययन परमिट की आवश्यकता होती है, जो विभिन्न शर्तों के अधीन छात्रों को दिया जाता है। आमतौर पर, एक कनाडाई अध्ययन परमिट उस पाठ्यक्रम की अवधि के लिए मान्य रहता है, साथ ही 90 दिनों का अतिरिक्त समय भी। इसका मतलब है कि पाठ्यक्रम समाप्त होने के बाद भी परमिट की वैधता 90 दिनों तक बनी रहती है।
अध्ययन परमिट की समाप्ति पर क्या करें?
हालांकि, कई बार छात्रों को कुछ पाठ्यक्रमों में असफलता का सामना करना पड़ता है या विभिन्न कारणों से उनकी शैक्षणिक कार्यक्रम की अवधि बढ़ जाती है। इस स्थिति में, जबकि उनकी पढ़ाई की वास्तविक अवधि बढ़ती है, अध्ययन परमिट की वैधता अपरिवर्तित रहती है। ऐसे में, यह महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है कि यदि उनका अध्ययन परमिट समाप्त हो जाता है, तो उन्हें क्या करना चाहिए? क्या उन्हें देश छोड़ना होगा, या वे कनाडा में रह सकते हैं? आइए इसका उत्तर खोजते हैं।
क्या करें यदि आपका अध्ययन परमिट समाप्त हो गया है?
IRCC के नियमों के अनुसार: एक अंतरराष्ट्रीय छात्र देश में तब तक रह सकता है जब तक उसने नए परमिट के लिए आवेदन किया है, भले ही उसका मौजूदा परमिट समाप्त हो गया हो। छात्रों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे अपने मूल परमिट की समाप्ति से पहले नए परमिट के लिए आवेदन करें। यदि उन्होंने नए परमिट के लिए आवेदन किया है, तो वे कानूनी रूप से देश में रह सकते हैं। इसके अलावा, यदि कोई छात्र अपने मौजूदा अध्ययन परमिट को बढ़ाने के लिए आवेदन करता है, तो वह भी कनाडा में रहने के लिए अधिकृत है।
अन्य विकल्प
ऐसे छात्रों को केवल यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्होंने अपने मूल परमिट की समाप्ति से पहले विस्तार के लिए आवेदन किया हो। IRCC के नियमों के अनुसार, यदि कोई छात्र नए परमिट या विस्तार के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उसे तुरंत अपनी पढ़ाई बंद करनी होगी। वह एक विज़िटर या कार्य परमिट के लिए आवेदन कर सकता है; हालाँकि, यदि वह ऐसा नहीं करता है और उसके पास देश में रहने के लिए कानूनी अनुमति नहीं है, तो उसे तुरंत देश छोड़ना होगा। अनुपालन न करने की स्थिति में निर्वासन का जोखिम होता है।