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उत्तर प्रदेश में स्कूल चलो अभियान 2026-27 की शुरुआत

उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026-27 के लिए 'स्कूल चलो अभियान' की शुरुआत की है, जिसका लक्ष्य 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा से जोड़ना है। यह अभियान 1 अप्रैल से शुरू होकर दो चरणों में चलेगा। शिक्षकों की टीमें घर-घर जाकर बच्चों की पहचान करेंगी और उन्हें स्कूल में नामांकित करेंगी। दस्तावेजों की कमी के कारण किसी भी बच्चे को प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य शून्य ड्रॉपआउट दर प्राप्त करना है।
 

उत्तर प्रदेश में स्कूल चलो अभियान का उद्देश्य



UP School Chalo Abhiyan 2026-27: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के हर बच्चे को शिक्षा के दायरे में लाने के लिए कदम उठाए हैं। 'स्कूल चलो अभियान' (Go to School Campaign) का आयोजन शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 1 अप्रैल से शुरू किया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों की पहचान करना और उन्हें स्कूल में नामांकित करना है, जो 6 से 14 वर्ष की आयु के हैं और किसी कारणवश शिक्षा से वंचित रह गए हैं या स्कूल छोड़ चुके हैं। इस बार, यूपी शिक्षा विभाग का लक्ष्य शून्य ड्रॉपआउट दर प्राप्त करना है।


अभियान के चरण और तैयारी

यह 'स्कूल चलो अभियान' दो चरणों में विभाजित किया गया है: पहला चरण 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 1 जुलाई से 15 जुलाई तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान, शिक्षक अपने-अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे ताकि उन बच्चों की पहचान की जा सके जो स्कूल से बाहर हैं। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वित्तीय बाधाएं या दस्तावेजों की कमी किसी भी बच्चे के भविष्य में बाधा न बने। राज्य के सभी स्कूलों को 31 मार्च तक सभी आवश्यक तैयारियां पूरी करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।


हर घर तक पहुंचने की योजना

शिक्षकों की टीम हर घर तक पहुंचेगी; डेटा बेस बनाया जाएगा


इस अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए, शिक्षकों की टीमें मोहल्लों और गांवों में सर्वेक्षण करेंगी। इस सर्वेक्षण के दौरान, 3 वर्ष के बच्चों को आंगनवाड़ी या बालवाटिका (प्रेस्कूल) में नामांकित किया जाएगा, जबकि 6 वर्ष के बच्चों को कक्षा 1 में दाखिला दिया जाएगा। विशेष ध्यान 7 से 14 वर्ष के उन बच्चों पर दिया जाएगा जो स्कूल छोड़ चुके हैं, ताकि उन्हें शिक्षा प्रणाली में पुनः शामिल किया जा सके।


दस्तावेजों की अनिवार्यता समाप्त

दस्तावेजों की अनिवार्यता समाप्त; हर बच्चे को मिलेगा प्रवेश


अक्सर देखा जाता है कि समाज के कमजोर वर्गों के बच्चे जन्म प्रमाण पत्र या आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों की कमी के कारण नामांकित नहीं हो पाते। यूपी सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बच्चे को इन दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण प्रवेश से वंचित नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, कक्षाओं 5, 6, 8, 9, 10 और 11 के छात्रों के लिए 100% पदोन्नति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल उच्च प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए है।


अभियान के लिए बजटीय प्रावधान

इस 'स्कूल चलो अभियान' (Back-to-School Campaign) के प्रभावी कार्यान्वयन और प्रचार के लिए, प्रत्येक स्कूल को ₹2,500 का आवंटन किया जाएगा। इस राशि का उपयोग स्कूल की स्वच्छता, बैनर और पोस्टर, और जागरूकता रैलियों के लिए किया जाएगा। सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस अभियान की निगरानी करें ताकि उत्तर प्रदेश में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।